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गोबर से वर्मी कम्पोस्ट बनाने का व्यवसाय | Vermi Compost Making Business from Cow Dung

केंचुओं द्वारा तैयार मल से उत्पन्न होने वाली खाद को वर्मी कम्‍पोस्‍ट कहा जाता है. प्राकृतिक तरीके अथवा आर्गेनिक फार्मिंग के तहत उगाये जाने वाले प्रत्येक पौधे को अच्छी ग्रोथ देने के लिए प्राकृतिक गोबर खाद अथवा गोबर से वर्मी कम्पोस्ट का उपयोग किया जाता है. वर्मी कम्पोस्ट जिसे वर्म कम्पोस्टकेचुआ खाद के भी नाम से जाना जाता है.

आज बीमारियों की मारक क्षमता पहले से बढ़ चुकी है, इसका मुख्य कारण यह है कि आज हम जो खाद्य सामग्री खाते या खा रहे हैं, उस खाद्य सामग्री जैसे- सब्जियां, फल व अनाज को उगाने के लिए रासायनिक खाद जैसे- DAP व यूरिया के साथ खतरनाक कीट नाशक का उपयोग धड़ल्ले से किया जा रहा है.

रासायनिक खाद की मदद से उगाई गई फसल का सेवन करने में सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि पौधे अपनी ग्रोथ के लिए रासायनिक खाद को अवशोषित कर लेते हैं.

फलस्वरूप पौधे द्वारा उत्पन्न किया जाने वाले प्रत्येक फल, सब्जी व अनाज में रासायनिक खाद के तत्व विद्यमान हो जाते हैं, और जब हम रासायनिक खाद से पैदा की गई खाद्य सामग्रियों का सेवन करते हैं तो यह हमारे immune system को बड़े स्तर की क्षति पहुचाने का काम करता है.

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तो इसका समाधान क्या है? इसका समाधान मात्र एक ही है क्यों न ऐसी खाद का प्रयोग में लिया जाए जिसमें किसी भी तरह के रासायनिक घटक मौजूद ही न हों और इस खाद को उपयोग में लेने से फसल उत्पादन में उच्च गुणवत्ता की फसल व खाद्य सामग्री आसानी से प्राप्त हो सके.

गाय का गोबर एक ऐसा बहुमूल्य संघटक है जो प्राकृतिक खाद प्राप्त करने जैसी समस्या को पूर्ण रूप से समाप्त करने की क्षमता रखता है. अमूमन सामान्य रूप से गोबर के सड़ने-गलने से बनी खाद शक्तिशाली मानी जाती है,

लेकिन वहीं पर यदि गोबर के समुचित निपटान के दृष्टिगत गोबर में केचुए आदि को डालकर खाद का निर्माण किया जाए तो यह निर्मित केचुआ खाद, गोबर के स्वत: सड़ने-गलने से तैयार होने वाली खाद की अपेक्षा बहुत अधिक शक्तिशाली होती है.

और मौजूदा समय में व्यवसायिक स्तर पर गोबर से प्राकृतिक खाद बनाना अथवा गोबर से वर्मी कम्पोस्ट का निर्माण करना एक सफल उद्यम/कारोबार की श्रेणी में गिना जाता है. जिसे बहुत ही कम लागत के साथ कहीं भी और कभी भी आसानी से शुरू कर शुरूआती चरण में अच्छा मुनाफा भी कमाया अथवा बनाया जा सकता है. वैसे भी मौजूदा समय में खाद बनाने के बिजनेस को मुनाफे का कारोबार माना जाता है.

यदि आप भी एक सफल कारोबारी बनने की इच्छा रखते हैं तो एक बार खाद बनाने के उद्यम/व्यवसाय में अपना हाथ जरूर आजमाए.

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गोबर से वर्मी कम्पोस्ट बनाने के लाभ-

वैसे तो गोबर से बनी वर्मी कम्पोस्ट के लाभ कई हैं, लेकिन व्यवसायिक तौर दो लाभ ऐसे हैं जिनको अपनाने से शुरूआती स्तर पर भी अच्छे मुनाफे को बेझिझक आसानी से बनाया जा सकता है-

  1. कचरा संग्रहण शुल्क (कम से कम) लगाकर घरों से जैविक कचरे का संग्रहण करना- जो वेस्ट रीसायकल की सकारात्मक पहल दर्शाती है जिससे waste to wealth (कचरे से कमाई) विचार को बल मिलता है.
  2. जैविक अपशिष्ट पदार्थों का उचित प्रबंधन करने के लिए सीमित स्थान बनाना- मुख्य रूप से अनचाहे क्षेत्रों को कूड़ादान या कूड़ाघर बनने से रोकना.

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गोबर से वर्मी कम्पोस्ट बनाने के लिए जरूरी घटक-

गोबर उत्पाद निर्माण व्यवसाय के तहत सरल तरीके से गोबर से वर्मी कम्पोस्ट बनाने के लिए मुख्य 03 घटकों की आवश्यकता होती है-

  1. पशुधन गोबर (कम से कम 03 से 06 माह पुराना)
  2. किचन वेस्ट (जैविक कचरा)
  3. बेड विधि से कम्पोस्ट तैयार करने के लिए ग्रो बैग्स (कम से कम 15 लम्बाई X 3 चौड़ाई X 3.50 ऊँचाई पैमाना फुट में है)
  4. शेड कवर (चयनित स्थान के लिए)
  5. वर्मी कम्पोस्ट के लिए केचुआ (आइसीनियायूडीलस  किस्म के केचुए)
  6. साफ पानी/जल

गोबर से वर्मी कम्पोस्ट बनाने के लिए स्थान की आवश्यकता-

व्यवसायिक तौर पर प्राकृतिक गोबर खाद अथवा गोबर से वर्मी कम्पोस्ट बनाने का कारोबार/व्यवसाय अथवा उद्यम स्थापित करने के लिए इच्छुक उद्यमी को कम से कम 100 वर्ग फुट स्थान की आवश्यकता होती है. जहां पर बेड लगाने का स्थान व कच्चे माल को संरक्षित रखने का स्थान पहले से निर्धारित किया गया हो. आपके चयनित स्थान पर पानी/जल आदि की व्यवस्था का होना आवश्यक है.

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साथ ही बेड को एक तरफ से ढलुआ स्थापित करना आवश्यक है, ऐसा इसलिए क्योंकि जब वर्म द्वारा कम्पोस्ट का निर्माण किया जाता है तो खाद बनते समय थोड़ा तरल निकलता है, जिसे एक पात्र में इकठ्ठा किया जा सके. इस तरल को “वर्मीवाश” कहा जाता है और यह वर्मीवाश, वर्मी कम्पोस्ट से अधिक शक्तिशाली होता है.

खाद निर्माण व्यवसाय का पंजीकरण-

छोटे अथवा बड़े दोनों स्तरों पर गोबर से प्राकृतिक खाद अथवा वर्मी कम्पोस्ट बनाकर बाजार में बिक्री करने के लिए अथवा व्यवसायिक स्तर पर गोबर आधरित उत्पादों को बनाने और बाजार में बिक्री करने के लिए Gobar Products Manufacturing Business का इच्छुक उद्यमी/किसान को अपने व्यवसाय/उद्यम का पंजीकरण कराना अनिवार्य है.

व्यवसाय का पंजीकरण कराने से सरकार द्वारा व्यवसाय शुरू करने के लिए लोन व सब्सिडी जैसी सुविधा भी सुलभ हो जाती है.

गोबर उत्पाद निर्माण व्यवसाय शुरू करने के लिए नीचे बताए गए प्रमाणों से प्रमाणन कराना होता है-

  1. MSME (उद्यम पंजीकरण)
  2. GST No (टैक्स पंजीकरण)
  3. NOC (No Objection Certificate) प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अनापत्ति प्रमाण

गोबर से वर्मी कम्पोस्ट बनाने की विधि-

मौजूदा परिदृश्य में गोबर से वर्मी कम्पोस्ट/प्राकृतिक गोबर की खाद बनाने अथवा निर्मित करने की विभिन्न विधियां हैं और वर्मी कम्पोस्ट बनाने की प्रक्रिया को किसी भी स्थान पर आसानी से शुरू किया जा सकता है. केचुआ खाद को निर्मित करने की सबसे बेहतर तकनीक परत दर परत (bed by bed या layer by layer) मानी जाती है और हम इसी विधि का उल्लेख करने जा रहे हैं-

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प्रथम चरण-

  • कम्पोस्ट का निर्माण करने के लिए सबसे पहला घटक है गोबर. केचुआ खाद या वर्मी कम्पोस्ट को बनाने के लिए गोबर कम से कम 03 से 07 माह पुराना होना प्राथमिक चरण है. ऐसा इसलिए क्योंकि ताजा गोबर गर्म होता है और उसमें विषैली गैसों का समायोजन बड़ी मात्रा में होती है.
  • प्रथम चरण की शुरुआत में सबसे पहला काम होता है चयनित स्थान पर बेड/बैग लगाने का. वर्मी कम्पोस्ट बनाने के लिए चयनित स्थान पर सीमेंटेड क्यारी अथवा ग्रो बैग्स का इस्तेमाल किया जा सकता है.
  • इसके बाद यदि गोबर सूखा है तो इसे थोड़ा पानी डालकर हल्का सा नम करना जरूरी होता है. साथ ही गोबर के बड़े ढेलों को छोटे टुकड़ों में तोडना अथवा छोटा करना प्राथमिक चरण होता है.

दूसरा चरण-

  • प्रथम चरण अंतर्गत बेड/बैग का सेटअप कर लेने के बाद दूसरे चरण में कम्पोस्ट बनाने के लिए क्यारी/ग्रो बैग में सबसे पहली परत (लगभग आधा इंच मोटी) सूखी पत्तियों या भूसे/पैरे की परत बिछाई जाती है. (यदि पहली परत में भूसे/धान की पुआल/पैरे के स्थान पर कैसी भी सूखी पत्तियों का इस्तेमाल करते हैं तो सबसे उत्तम है.)
  • पहली परत बिछा लेने के बाद दूसरी परत में नम गोबर की एक परत बिछाई जाती है. जो लगभग 02 से 2.50 इंच मोटी हो सकती है.
  • दूसरी परत के बाद तीसरी परत में भूसे/धान की पुआल/पैरे की आधा इंच मोटी परत बिछाई जाती है. प्रत्येक परत बिछाने के बाद पानी का छिड़काव करना बेहद जरूरी चरण है.
  • इसके बाद पुन: गोबर की परत फिर पैरे की परत. इस प्रकार आप कम से कम 03 और अधिक से अधिक 06 परतों का बेड बनाया जा सकता है.

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  • गोबर की अंतिम परत के बाद पैरे/भूसे की कम से कम 01 इंच मोटी परत लगाकर ऊपर से अच्छे से पानी छिड़कना होता है ताकि भूसा/पैरा अथवा सूखी पत्तियां हवा में उड़ न पाए बल्कि अच्छे से सेट हो जाएँ.

तीसरा चरण-

  • कम्पोस्ट के बेड लगा लेने के बाद अंतिम चरण में अर्थ वर्म मतलब केचुओं को बेड के ऊपर फैलाकर रख दिया जाता है. इसके बाद केचुए अपने आप ही उस स्थान पर पहुंच जाते हैं जहां उन्हें होना चाहिए.
  • बेड पर केचुआ रखने से पहले कम्पोस्ट क्यारी पर शेड का लगा होना जरूरी है. क्योंकि वर्मी कम्पोस्ट बनाने वाला केचुआ सूरज की तेज व सीधी धूप सहन करने में असमर्थ होता होता है.
  • केचुओं के अपने स्थान पर पहुँचते ही केचुए अपना काम शुरू कर देते हैं और लगभग 50 से 65 दिनों के भीतर हमारा वांछित उत्पाद “गोबर से वर्मी कम्पोस्ट” उपयोग में लिए जाने को पूरी तरह से तैयार हो जाती है.
  • एक तरफ जहाँ वर्मी कम्पोस्ट बनकर तैयार होती है वहीँ दूसरी तरफ खाद से निकला पानी “वर्मीवाश” भी प्राप्त होता है. यह वर्मीवाश वर्मी कम्पोस्ट से अधिक मूल्य पर बाजार में बिकता है, जो व्यवसायिक दृष्टी से उच्चे लाभ को इंगित करता है.

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ग्रामीण क्षेत्रों में वर्मी कम्पोस्ट का निर्माण करने के लिए गड्ढा बनाने की विधि-

  1. वर्मी कम्पोस्ट गड्ढ़े का आकार 10 फुट लम्बा X 03 फुट चौड़ा और डे़ढ से 2 फुट गहरा होता है. यहां गड्ढे का निर्माण यदि भूमि को खोदकर किया जा रहा है तो गड्ढे की प्रत्येक सतह पर तिरपाल बिछाना जरूरी है अन्यथा केचुआ सीधे मिट्टी में जा सकता है.
  2. वर्मी कम्पोस्ट बनाने में गोबर, बायोगैस स्लरी, फसल अवशेष, रसोई का कचरा आदि का उपयोग किया जाता है.
  3. ग्रामीण क्षेत्र में वर्मी कम्पोस्ट का सफलतापूर्वक निर्माण करने के लिए ऐसी जगह का चयन किया जाता है. जहां जल भराव जैसी समस्या न हो.
  4. 45-60 दिनों में केंचुओं के द्वारा हरे कचरे व गोबर आदि से केचुआ खाद बनकर तैयार होती है.
  5. वर्मी कम्पोस्ट बनाने की प्रक्रिया के दौरान बदबू नही आती है.
  6. वर्मी कम्पोस्ट खाद में नाइटोजन ,सल्फर, पोटास की मात्रा पाई जाती है.

सुझाव-

  • यदि आप गर्मी के मौसम में वर्मी कम्पोस्ट बनाने का व्यवसाय शुरू करना चाहते है तो हर 07 से 15 दिनों के अंतराल पर खाद बनने वाले गोबर पर पानी का छिडकाव अवश्य करें, क्योंकि वर्मी कम्पोस्ट बनाने वाले केचुए को नम तापमान चाहिए होता है.
  • सूखी पत्तियों में नीम की पत्तियों का इस्तेमाल विशेष रूप से करें, खाद में नीम की मौजूदगी होने से अन्य परजीवी नहीं पनपते. फलस्वरूप हमें उत्तम गुणवत्ता की वर्मी कम्पोस्ट प्राप्त होती है.
  • आप गोबर के साथ किचन वेस्ट से निकले जैविक कचरे को छोटे टुकड़ों में काटकर मिला सकते हैं. जैविक किचन वेस्ट तैयार होने वाली खाद को और भी शक्तिशाली बना देता है.
  • कचरे तथा गोबर को जल्द अपघटित करने के लिए तैयार किये गए वर्मी कम्पोस्ट बेड पर 15 से 20 दिनों बाद गुड़ और दही को पानी में मिलाकर छिडकाव करना होता है. यहां 10 लीटर पानी में 01 से डेढ़ किलो दही और 150 से 200 ग्राम गुड़ का प्रयोग किया जाता है.

गोबर से वर्मी कम्पोस्ट बनाने के व्यवसाय में मुनाफा (Vermi Compost/Earthworm fertilizer business profit)-

वर्मी कम्पोस्ट के बिजनेस में मुनाफे की बात की जाए तो वर्मी कम्पोस्ट निर्माण व्यवसाय/उद्यम हर तरह से एक अच्छे और लम्बे मुनाफे का कारोबार है. वर्मी कम्पोस्ट के व्यवसाय में उद्यमी तीन तरीको से मुनाफा कमा सकता है-

  1. वर्मी कम्पोस्ट खाद बेचकर
  2. वर्मीवाश का विक्रय कर
  3. वर्म मतलब बढ़े केचुओं का विक्रय कर
  4. उपरोक्त बताई गई तकनीक से तैयार वर्मी कम्पोस्ट की कीमत मौजूदा खुदरा बाजार में कम से कम 110 से 150 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से विक्रय की जाती है.
  5. इसके अलावा जो वर्मीवाश तरल प्राप्त होता है उस वर्मीवाश की कीमत खुदरा बाजार में कम से कम 180 से 220 प्रति लीटर की दर से बड़ी ही सरलता से विक्रय किया जाता है.
  6. साथ ही जब खाद तैयार हो चुकी होती है तो निर्मित खाद में केचुओं की गिनती भी पहले बढ़ चुकी होगी. इन अतिरिक्त केचुओं को भी खुदरा बाजार में आसानी से लगभग 250 से 400 रूपये में केचुआ प्रति किलोग्राम की दर से विकय किया जाता है.

FAQ.

वर्मी कंपोस्ट और गोबर की खाद में क्या अंतर है?

प्राकृतिक गोबर की खाद बनाने के लिए गोबर के साथ सब्जियों व फलों के छिलके, पत्तियों व घास-फूस आदि को मिलाकर सड़ाया को जाता है, इस प्रोसेस से खाद को तैयार करने में 75 से 90 दिन या कभी कभी इससे ऊपर भी लग जाते हैं. जबकि गोबर से वर्मी कम्पोस्ट खाद को तैयार करने के लिए गोबर में जैविक कचरे को मिलाकर उसमें केचुओं को छोड़ दिया जाता हैं. जहाँ केचुए गौ अपशिष्ट को खाद में परिवर्तित कर देते हैं. यह प्रक्रिया 60 से 75 दिनों में पूर्ण हो जाती है.

गोबर खाद कैसे बनता है?

गोबर से खाद 02 तरीकों से बनायीं जाती है-
1. गोबर को सड़ाकर
2. केचुओं की मदद से गोबर की खाद (वर्मी कम्पोस्ट) तैयार करना

वर्मी कम्पोस्ट बनाने की विस्तृत जानकारी के लिए पोस्ट को पढ़ें.

घर के गमलों में कौन सी खाद डालें?

किचन गार्डनिंग/टेरेस गार्डनिंग (घर पर बागवानी) के प्रेमी अधिकतर ऐसी खाद को खरीदना/उपयोग करना पसंद करते हैं जो कम लागत पर आसानी से मिल जाए. एक सर्वे के मुताबिक घर पर खेती करने वाले अधिकतर बागवानी प्रेमियों की पहली पसंद वर्मी कम्पोस्ट है.

गोबर की खाद कितने दिनों में तैयार होती है?

प्राकृतिक रूप से गोबर की खाद को तैयार होने के लिए 75 से 90 दिन लग जाते हैं, जबकि गोबर से वर्मी कम्पोस्ट खाद तैयार होने में मात्र 60 से 75 दिनों में ही तैयार हो जाती है.

गोबर की खाद में क्या पाया जाता है?

गोबर की खाद में-
1. 50% नाइट्रोजन,
2. 20% फास्फोरस व पोटेशियम सबसे अधिक पाया जाता है.

इसके अलावा गोबर की खाद में अन्य सभी तत्व जैसे- मैग्नीशियम, गंधक, लोहा, मैंगनीज, कैल्शियम, तांबा व जस्ता आदि तत्व भी सूक्ष्म मात्रा में पाए जाते हैं.

अंत में-

हमारा उद्देश्य उन इच्छुक उम्मीदवारों, उद्यमियों और किसानों को बेहतर और विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराना है जो गोबर आधारित उत्पाद निर्माण व्यवसाय के क्षेत्र में अपना भविष्य देख रहे हैं अथवा बनाना चाहते है.

आशा है आपको इस लेख “कैसे शुरू करें गोबर से खाद बनाने का व्यवसाय” से गोबर उत्पाद (cow dung product manufacturing) उद्यम/व्यवसाय, व्यापार अथवा कारोबार के बारे में पूरी जानकारी जरूर मिली होगी, साथ ही… यदि कुछ पूछना चाहते हों तो कृपया comment box में जरूर लिखें. साथ ही share करना बिल्कुल न भूलें… आपका एक share किसी को एक नई दिशा दिखा सकता है.. अभी तक के लिए-

शुभकामनाएं आपके कामयाब और सफल व्यापारिक भविष्य के लिए.

धन्यवाद!

जय हिंद! जय भारत!

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