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गोबर से मूर्ति दीये व गमले बनाने का व्यवसाय | Business of Making Statue Dia and Pots from Cow Dung in Hindi

गोबर उत्पाद निर्माण बिजनेस अंतर्गत गोबर से मूर्ति दीये व गमले निर्माण व्यवसाय की विस्तृत जानकारी, गोबर से मूर्ति, दीये व गमले बनाने के लिए रॉ मटेरियल व उनकी मात्रा, व्यवसाय का पंजीकरण, व्यवसाय का संभावनाएं, बाजार की मांग, गोबर के उत्पाद बनाने की प्रक्रिया, गोबर उत्पाद व्यवसाय की लागत व मुनाफा

भारत में गोबर से मूर्ती दीये व गमले बनाने का व्यवसाय पिछले कुछ सालों से लगातार तीव्र गति से विस्तारित होता जा रहा है. असल में वैश्विक महामारी ने जहां एक तरफ कई समस्याओं को पैदा किया है वहीं दूसरी तरफ कई प्रकार के startups को भी जन्म दिया है, जिसके कारण आज गोबर से बने ऐसे उत्पाद भी बाजार में उभर चुके हैं, जो Eco-friendly होने के साथ अच्छी आय भी आर्जित करने की क्षमता रखते हैं.

तैयार किये गए गोबर से मूर्ति दीये व गमले Eco-friendly होने के साथ-साथ सामान्य वातावरण में स्वत: ही विघटित भी हो जाते है और विघटन पर मिट्टी की उर्वरक क्षमता को बढ़ाने का काम करते हैं. गोबर से मूर्ति दीये व गमले बनाने का व्यवसाय ऐसे business startup हैं, जिसे कोई भी इच्छुक उद्यमी/व्यवसायीय कम लागत पर आसानी से शुरू कर सकता है और प्रारंभिक स्तर पर इससे अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है.

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तो अब प्रश्न उठता है कि गोबर से बनी मूर्तियां, दीये व गमलों का निर्माण व्यवसाय शुरू करने के लिए किन-किन चीजों व घटकों की आवश्यकता होगी?

अनुक्रमिका

गोबर से मूर्ति दीये व गमले बनाने के लिए रॉ मटेरियल-

  1. गोबर – 1 kg
  2. साधारण मिट्टी – 220 से 240 Gm
  3. गेहूं का भूसा (बारीक़ पीसा हुआ) – 100 से 175 Gm
  4. प्राकृतिक गोंद – 7 से 12 Gm
  5. चूना – 50 ग्राम (वैकल्पिक)
  6. ग्वार गम – आवश्यकतानुसार

गोबर से मूर्ति दीये व गमले बनाने के लिए गाय का गोबर, साधारण मिट्टी, भूसा व प्राकृतिक गोंद को क्रमशः रेसिपी के अनुसार मिश्रण तैयार कर वांछित उत्पाद निर्मित किये जाते है.

नोट-

  1. यहां गाय के गोबर व मिट्टी को रिफाइन कर गोबर व मिट्टी का चूर्ण बनाना प्राथमिक चरण होता है.
  2. गोबर का पाउडर बनाने के लिए पल्वालाईज़र मशीन का उपयोग किया जाता है. मौजूदा बाजार में यह मशीन अलग-अलग भार क्षमता की आती है तथा इस मशीन की कीमत 35,000 रूपये प्रति इकाई से शुरू हो जाती है.
  3. इस पल्वालाईज़र मशीन में गोबर के साथ मिट्टी व भूसे का भी चूर्ण (पाउडर) आसानी से बनाया जा सकता है.

गोबर से मूर्ति दीये व गमले बनाने के लिए मशीनरी-

गोबर की बनी मूर्ति दीये व गमले बनाने के लिए …. मशीन की आवश्यकता होती है-

  1. Mixing Machine
  2. Cow Dung Pot Making Machine (गोबर से गमला बनाने की मशीन)
  3. Cow Dung Dia Making Machine (गोबर से दीया बनाने की मशीन)
  4. Cow Dung Statue Making Machine (गोबर से मूर्ती बनाने की मशीन)

गोबर से मूर्ति दीये व गमले बनाने की विधि-

गोबर उत्पाद निर्माण व्यवसाय के तहत गोबर से मूर्ति दीये व गमले बनाने में मात्र 03 ही चरण होते हैं, जो इस प्रकार हैं-

  1. सबसे पहले कच्चे माल को बारीक़ पीसकर तैयार किया जाता है.
  2. इसके बाद तैयार मिश्रण से वांछित उत्पाद बनाने के लिए सम्बंधित मशीन की मदद से उत्पाद का निर्माण किया जाता है.
  3. आकार में ढाल जाने के बाद वांछित उत्पाद को सूखने के लिए खुले वातावरण में रख दिया जाता है. करीब 03 से 05 दिनों बाद वांछित उत्पाद सूखकर ठोस व मजबूत हो जाने पर, उसे उपयोग में लिया जा सकता है.

गोबर उत्पाद निर्माण व्यवसाय स्थापित करने के लिए आवश्यक स्थान-

गोबर से मूर्ति दीये व गमले बनाने के कारोबार/व्यवसाय को स्थापित करने के लिए छोटे स्तर पर कम से कम 500 से 700 sqft स्थान की आवश्यकता होती है. यहां चयनित स्थान का आधे भाग में छत अथवा शेड का होना आवश्यक है.

वही यदि बड़े स्तर पर गोबर से मूर्ति दीये व गमले बनाने के व्यवसाय/उद्यम को शुरू करना चाहते हैं तो बड़े स्तर पर 1500 से 3500 sqft स्थान की आवश्यकता होगी. जहां कच्चे माल से लेकर तैयार माल को सुरक्षित रखने के अलावा मशीनों के स्थान भी पहले से निर्धारित किये गए हों.

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गोबर आधारित उत्पादों का व्यवसाय/बिजनेस शुरू करने के लिए ऐसे स्थान का चयन किया जाता है, जो बाजार क्षेत्र से थोड़ा हटकर हो तथा चयनित स्थान पर वाहनों व ग्राहकों के आवागमन करने के लिए उचित व्यवस्था हो. आपके चयनित स्थान पर बिजली आदि की व्यवस्था का भी होना अनिवार्यता है.

बड़ा स्थान होने से एक फायदा और मिलता है- जहां एक तरफ आप गोबर आधारित उत्पादों की प्रदर्शनी कर अपने ग्राहकों को आकर्षित कर सकते हैं, वहीं दूसरी ओर ग्राहक/उपभोक्ता आपके स्थान पर आकार उत्पाद निर्माण प्रक्रिया का अनुभव भी प्राप्त कर सकता है. व्यवसायिक दृष्टी से इस प्रकार का कदम हमेशा एक अच्छे मुनाफे की सम्भावना को दर्शाता है.

गोबर उत्पाद निर्माण व्यवसाय का पंजीकरण (Dung Product Manufacturing Business Registration)-

व्यवसायिक स्तर पर गोबर आधरित उत्पादों को बनाने और बाजार में बिक्री करने के लिए Gobar Products Manufacturing Business का पंजीकरण कराना अनिवार्य है. व्यवसाय का पंजीकरण कराने से सरकार द्वारा व्यवसाय शुरू करने के लिए लोन व सब्सिडी जैसी सुविधा भी सुलभ हो जाती है.

गोबर से मूर्ति दीये व गमले बनाने के व्यवसाय को शुरू करने के लिए नीचे बताए गए प्रमाणों से प्रमाणन कराना होता है-

  1. MSME (उद्यम पंजीकरण)
  2. GST No (टैक्स पंजीकरण)
  3. NOC (No Objection Certificate) प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अनापत्ति प्रमाण पत्र

गोबर से बने उत्पाद की रंगाई व पुताई करना-

गोबर से मूर्ति दीये व गमले बनाने के व्यवसाय/कारोबार में उत्पाद की रंगाई व पुताई की सबसे अहम भूमिका होती है. हालांकि बिना रंगाई, पुताई के भी उत्पाद को उपयोग में लिया जा सकता है. लेकिन यदि गोबर से मूर्ति दीये व गमले बनाने के व्यवसाय से बेहतर मुनाफा कमाना है तो यह जरूरी है उत्पाद को उच्च स्तर तक सुन्दर और आकर्षक बनाना जरूरी है.

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यह बात सौ आना सही है क्योंकि बेहतर गुणवत्ता के साथ जो उत्पाद दिखने में आकर्षक होता है, ग्राहक सबसे पहले उसी को पाने की कोशिश करते है. ग्राहकों की यही होड़ किसी भी उत्पाद की बिक्री पर गहरा प्रभाव डालती है.

गोबर आधारित उत्पादों को प्राकृतिक रंगों से ही रंगा जाता है, ऐसा इसलिए क्योंकि गोबर आधारित उत्पाद एक निश्चित समय के बाद स्वत: ही अपघटित हो जाते हैं. अपघटित होने से गोबर उत्पाद मिट्टी की उर्वरक क्षमता को बढ़ाने का काम करते हैं. प्राकृतिक रंगों का निर्माण व्यवसाय भी अच्छे मुनाफे का कारोबार है, जिसे बहुत ही कम लागत के साथ आसानी से शुरू किया जा सकता है.

गोबर से मूर्ति दीये व गमले बनाने का व्यवसाय शुरू करने की लागत-

छोटे स्तर पर गोबर से मूर्ति दीये व गमले बनाने का व्यवसाय शुरू करने के लिए इच्छुक उद्यमी अथवा व्यवसायीय को 70 हजार से लेकर 03 लाख रूपये की आवश्यकता होती है. जिसमें छोटे स्तर की मशीनरी, कच्चा माल व पौकिंग आदि खर्च शामिल है.

वही यदि आप गोबर से मूर्ति दीये व गमले बनाने के व्यवसाय को मध्यम स्तर पर शुरू करने के इच्छुक है तो मध्यम से बड़े स्तर पर इस व्यवसाय/उद्यम को शुरू करने के लिए 2.5 लाख से लेकर 06 लाख रूपये तक या इससे ऊपर का निवेश करना पड़ेगा. जिसमें हैवी ड्यूटी मशीनरी, किराये का स्थान, कच्चा माल, श्रमिक भत्ता/वेतन के साथ शुरूआती स्तर की मार्केटिंग भी शामिल है.

गोबर से मूर्ति दीये व गमले बनाने के व्यवसाय में मुनाफा-

यूं तो गोबर से निर्मित प्रत्येक उत्पाद वर्ष भर परिणाम में हमेशा ही अच्छा मुनाफा देते हैं. चूंकि हमारे देश भारत की संस्कृति में परंपरा व पूजन-अर्चन का विशेष महत्व है, इसलिए गोबर से बनी मूर्तियाँ और दीयों की मांग दीपावली जैसे पवित्र त्योहारों में बहुत अधिक बढ़ जाती है.

अमूमन मौजूदा बाजार में गोबर से बने साधारण दिए की बिक्री 05 से 08 रूपये प्रति पीस की दर से देखने को मिलती है, जिसकी लागत मात्र 01 से 02 तक लगती है. लेकिन वहीं गोबर से बने फैंसी/डिजाइनर दियों की बिक्री की बात की जाए तो फैंसी/डिजाइनर दीये 08 से 25 रूपये और कहीं कहीं तो 40 से 50 रूपये प्रति पीस की दर से देखने को मिलती है. जिसकी निर्माण लागत मात्र 04 से 08 रुपये तक ही आती है. जो व्यवसायिक दृष्टी से तगड़े मुनाफे को इंगित करता है.

इसी प्रकार मौजूदा बाजार में गोबर से बनी धार्मिक मूर्तियों की बिक्री कम से कम 70 रूपये प्रति पीस की दर से शुरू होती है. जिसकी निर्माण लागत मात्र 20 से 25 रूपये तक ही आती है. यदि आप प्राकृतिक सामग्री से तैयार की गई मूर्तियों से अच्छा मुनाफा कमाना चाहते हैं तो फैंसी और ग्राहकों के अनुरूप नए-नए डिजाइन अपनाने की कोशिश करें.

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वहीं यदि बात की जाए गोबर से बने गमलों में मुनाफे की तो व्यवसायिक स्तर पर गोबर से प्राकृतिक गमलों का निर्माण बाजार मांग अथवा ग्राहक के अनुसार अलग-अलग साइज़ के हिसाब से किया जाता है. जहां मुनाफा गमलों के साइज़ व क्षमता पर निर्भर करता है. मोटे तौर पर गोबर से बने प्रति गमले पर कम से कम 40 से 60% तक मुनाफा आसानी से बनाया जा सकता है.

यदि आप अपने व्यवसाय/कारोबार का मुनाफा बड़े स्तर पर बढ़ाना चाहते हैं तो मेरा सुझाव है कि आप अपने गोबर से बने उत्पादों को ऑनलाइन लेकर जायें, जहां एक वेबसाइट का निर्माण करना अथवा करवाना होगा, जिसका सालाना खर्च कम से कम 10,000 तक आ सकता है. शुरूआती स्तर पर आप e-commerce प्लेटफार्म को देख सकते हैं.

FAQ.

गोबर से मूर्ति दीये व गमले बनाने वाली मशीन की कीमत क्या है?

गोबर से गमला बनाने की मशीन की कीमत = 25,000 रुपये प्रति इकाई से शुरू
गोबर से दीया बनाने की मशीन की कीमत = 15,000 रूपये प्रति इकाई से शुरू

गोबर से मूर्ती बनाने के लिए दीया मशीन अथवा प्रेस मशीन (दबाने की मशीन) की ही जरूरत होती है, यहां दीया बनाने वाली डाई को बदलकर मूर्ती निर्माण करने वाली डाई का प्रयोग किया जाता है. (मूर्ती बनाने के लिए दीया मशीन को उच्च गुणवत्ता/क्षमता का होना आवश्यक है)

गोबर से मूर्ति दीये व गमले बनाने के व्यवसाय में कितना मुनाफा होता है?

गोबर से मूर्ती दीये व गमले आदि निर्माण के व्यवसाय में मुनाफा उत्पाद के आकार व रंग व सजावट के आधार पर भिन्न-भिन्न होता है. मोटे तौर पर गोबर उत्पादों पर मुनाफा 20 से 80% तक कमाया जा सकता है.

गोबर से मूर्ति दीये व गमले बनाने के व्यवसाय में कितना मुनाफा होता है?

गोबर से मूर्ती, दीये व गमला निर्माण व्यवसाय में मुनाफा उत्पाद के आकार व रंग व सजावट के आधार पर भिन्न-भिन्न होता है. मोटे तौर पर गोबर उत्पादों पर मुनाफा 20 से 80% तक कमाया जा सकता है.

गोबर से मूर्ति दीये व गमले बनाने के कारोबार में कितने मैनपावर की जरूरत होती है?

व्यवसायिक तौर पर गोबर आधारित उत्पादों का निर्माण व्यवसाय स्थापित करने के लिए कम से कम 03 से 05 मैनपावर की आवश्यकता होती है.

गोबर से बने उत्पादों को De-compost होने में कितना समय लगता है?

अमूमन गोबर से बने अधिकतर उत्पाद 03 माह के भीतर खाद में बदलकर मिट्टी की उर्वरक क्षमता बढ़ाने का काम करते हैं.

अंत में-

हमारे देश भारत की संस्कृति में पूजा-पाठ, यज्ञ व हवन रोजाना की दर पर बड़ी संख्या पर किया जाता है. यहां आमजन देव प्रतिक के रूप में मूर्ती पूजा के लिए मूर्ती, दीयो व अगरबत्ती/धूपबत्ती का प्रयोग करते हैं. गाय का गोबर प्रकृति की एक ऐसी देन है, जिससे लगभग सभी कर्म-कांड व प्राथमिक ईंधन को विधि अनुसार पूरा किया जा सकता है, साथ ही गोबर उत्पादों के विघटन से प्रकृति की भी सुरक्षा हो जाती है.

हमारा उद्देश्य उन इच्छुक उम्मीदवारों, उद्यमियों और किसानों को बेहतर और विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराना है जो गोबर आधारित उत्पाद निर्माण व्यवसाय के क्षेत्र में अपना भविष्य देख रहे हैं अथवा बनाना चाहते है.

आशा है आपको इस लेख “कैसे शुरू करें गोबर से मूर्ति दीये व गमले बनाने का व्यवसाय” से गोबर उत्पाद (Cow dung product manufacturing) उद्यम/व्यवसाय, व्यापार अथवा कारोबार के बारे में पूरी जानकारी जरूर मिली होगी, साथ ही… यदि कुछ पूछना चाहते हों तो कृपया comment box में जरूर लिखें. तब तक के लिए-

शुभकामनाएं आपके कामयाब और सफल व्यापारिक भविष्य के लिए.

धन्यवाद!

जय हिंद! जय भारत!

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6 COMMENTS

  1. Jai Gomata Ji,
    मेरा नाम गौतम, आंध्र प्रदेश से हू।
    आप का बहुत बहुत आभार जी, ऊपर दिया फॉर्मूला से मूर्तियां बनाया तो कितना दिन तक नहीं टूटेगा?

    • पिछले कई सालों से निर्माण कार्य किया जा रहा है… फ़िलहाल अभी कोई शिकायत आई नहीं है….

  2. जी धन्यवाद, और एक प्रश्न जी, हमारा अंद्रप्रदेश में गेहूं का बूसा नहीं मिलेगा, चावल का सूखा चारा मिलेगा वो हम उपयोग कर सकते हो क्या? कृपया मार्ग दर्शन कीजिए।

    • जी बिल्कुल आप धान की पराली और चावल की भूसी का उपयोग कर सकते हैं…

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