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गमले में आलू की खेती कैसे करें | Potato Cultivation at Home in hindi

आलू की खेती, आलू बोने की विधि, आलू के फायदे, potato cultivation time, आलू की उन्नत किस्में (Improved Varieties Of Potatoes), आलू में लगने वाले रोग व समाधान, आलू की खेती में खाद, आलू को हार्वेस्ट करना

सब्जियों का राजा के नाम से जाना जाने वाला आलू! आज हमारे देश में शायद ही कोई ऐसा घर होगा, जहाँ पर आलूओं का उपयोग न किया जाता हो. आलू को एक सम्पूर्ण भोजन भी कहा जाता है क्योंकि आज आलू से कई तरह के पकवानों को बनाया जाता है जो देखने में सुन्दर होने के साथ खाने में बेहद ही स्वादिष्ट भी होते हैं.

आलूओं से साधारण व मसालेदार सब्जी (तरकारी), पकौड़ी-पौकेड़े, चॉट, पापड जैसे स्वादिष्ट व्यंजनों के अलावा आलू चिप्स और आलू भुजिया भी आज हर एक की पहली पसंद बन चुकी है. प्रोटीन, स्टार्च, विटामिन-सी के अलावा आलूओं में अमीनो अम्ल जैसे- ट्रिप्टोफेन, ल्यूसीन, आइसोल्यूसीन और कार्बोहाइड्रेट आदि भी काफी मात्रा में पाये जाते है, जो शरीर के विकास और स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है.

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आलू में कार्बोहाइड्रेट, कैल्शियम, मैंगनीज, विटामिन-सी, बी-कॉम्पलेक्स, आयरन तथा फास्फोरस जैसे तत्त्वों का समावेश होता है. इसके अलावा आलूओं में कई औषधीय गुण होने के साथ-साथ सौंदर्य वर्धक गुण भी होते है. लेकिन मौजूदा बाजार में हमें जो आलू मिलता है, उसे कई तरह के केमिकल आधारित फर्टिलाईज़र का उपयोग कर उगाया जाता है, जिससे आलू की गुणवता में कई कमियां आ जाती हैं.

यदि आप बागवानी प्रेमी हैं और आर्गेनिक/प्राकृतिक रूप से उगे आलू का सेवन करना चाहते हैं तो आज इस पोस्ट के माध्यम से हम आपके साथ किचन गार्डनिंग या टेरेस गार्डनिंग के तहत छोटे स्तर पर ग्रो बैग या गमले में आलू की खेती कैसे करें की विस्तृत जानकारी साझा करने जा रहे हैं. तो चलिए शुरू करते हैं, सबसे पहले आप आलू के फायदों से अवगत कराते हैं-

आलू के फायदे (benefits of potatoes)-

आलू सिर्फ एक सब्जी ही नहीं बल्कि आलू में बहुत सारे औषधीय गुणों का भंडार भी होता है. हममें से कई लोगों को आलू के औषधीय गुणों की बहुत ही कम या आंशिक जानकारी ही होती है. जिसकी वजह से हम आलूओं को केवल सब्जी के रूप में ही प्रयोग करते हैं. 

  • आलू के पौधे से तैयार औषधि से कितनी भी भयानक खांसी हो, दूर की जा सकती है, खांसी दूर करने के लिए आलू का पौधा एक रामबाण का काम करता है. इसकी पत्तियों को उबालकर बनाए गए काढे के उपयोग से खांसी को आसानी से दूर किया जा सकता. 
  • इसके अलावा आलू की पत्तियों को मसलकर या पीसकर खुजली और एग्जिमा जनित स्थान पर बार-बार लगाया जाए तो आलू की पत्तियों से प्राप्त रस से खुजली और एग्जिमा को भी बड़ी सहजता से दूर किया जा सकता है. 
  • इसके अलावा कच्चे आलू को बारीक़ पीसकर अगर त्वचा पर लगाया जाए तो चेहरे के कील-मुंहासे और झाइयों को दूर करने के साथ त्वचा में निखर लाने का काम भी आसानी और सहजता से किया जा सकता है. यदि आप चेहरे की सुंदरता को बढ़ाना चाहते हैं, तो आलू चेहरे की सुंदरता में बहुत ही लाभकारी सिद्ध होता है.

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  • यदि एलर्जी प्रॉब्लम को ठीक करना हो तो भी आप आलू का प्रयोग कर सकते हैं. जलने-कटने व सूजन में भी कच्चे आलू को आधा काटकर या कुचलकर प्रभावित स्थान पर लगाया जाए तो जल्द ही आराम मिल जाता है. जले हुए स्थान पर निशान नहीं पड़ेगा.
  • इसके अलावा जिन लोगों को यूरिक एसिड की समस्या है या जिनका यूरिक एसिड बढ़ा हुआ है, वे आलू के पत्तियों को उबालकर उसमें थोड़ा सा सेंधा/साधारण नमक डालकर आलू के पत्तों से सिकाई करने से यूरिक एसिड में लाभ भी मिलता है.

आलू की खेती में आलू बुवाई का समय (Potato sowing time)-

अमूमन आलू एक ऐसी सब्जी है जो साल के 12 महीने बाजार में देखने की आसानी से मिलती है. आलू की इस उपलब्धता का मुख्य कारण है आलू की बुवाई जिसे बहुत ही बड़े स्तर पर किया जाता है. भारत के सर्द मौसम में आलू की बुवाई की जाती है-

  1. सितम्बर के आखिरी सप्ताह से मध्य नवम्बर तक अगेती में, फसल अवधि- 85 से 100 दिन
  2. मध्य नवम्बर से जनवरी के पहले सप्ताह तक पछेती में, फसल अवधि- 90 से 110 दिन

आलू की खेती में आलू की उन्नत किस्में (Improved Varieties Of Potatoes)

किचन गार्डनिंग व टेरेस गार्डनिंग (छत पर बागवानी) के तहत आलू की सामान्य किस्मों को बड़े स्तर की खेती के लिए उपयोग (खेत आदि) में लिया जाता है. हालांकि आलू की इन किस्मों को गमले या ग्रो बैग में भी लगाया जा सकता है और अच्छी उपज भी ली जा सकती है, किचन गार्डनिंग में मुख्य रूप से आलूओं की अगेती किस्मों को ही लिया जाता है. ये आलू की अगेती खेती में किस्में इस प्रकार हैं-

  1. कुफरी अलंकार, फसल अवधि- 80 से 100 दिन
  2. कुफरी पुखराज, फसल अवधि- 80 से 100 दिन
  3. कुफऱी चंदरमुखी, फसल अवधि- 85 से 100 दिन
  4. कुफरी अशोका, फसल अवधि- 85 से 100 दिन
  5. कुफरी जवाहर, फसल अवधि- 85 से 100 दिन

आलू की पछेती किस्में-

  1. कुफरी बहार, फसल अवधि- 90 से 110 दिन
  2. कुफरी लालिमा, फसल अवधि- 90 से 110 दिन
  3. कुफरी सतलुज, फसल अवधि- 90 से 110 दिन
  4. कुफरी सदाबहार, फसल अवधि- 90 से 110 दिन
  5. कुफरी सिंधुरी, फसल अवधि- 90 से 120 दिन
  6. कुफरी फ़्राईसोना, फसल अवधि- 90 से 120 दिन और
  7. कुफरी बादशाह, फसल अवधि- 90 से 120 दिन

आलू की खेती के लिए मिट्टी तैयार करना (Preparing of Soil Mix)-

किचन गार्डनिंग के तहत उच्च स्तर की बागवानी या आलू की पैदावार करने में सबसे अहम भूमिका निभाती है- soil media मतलब पौधों की मिट्टी की. आमतौर पर हममें से कई लोग इस चीज पर कोई खास ध्यान नहीं देते है, बस पौधों को सीधे गमलो की मिट्टी में लगा देते हैं और पानी के साथ कुछ बेसिक खाद आदि देकर अपना पीछा छुड़ा लेते हैं, 

इसके बाद इंतजार करते हैं कि हमारा लगाया गया पौधा जल्द से जल्द बड़ा होकर अच्छे फल व फूल देना शुरू कर दे, लेकिन जब पौधा अच्छे फल व फूल नहीं देता तो कहते हैं कि वो पौधा ही ख़राब है. समस्या यह नहीं है कि पौधा ख़राब है, बल्कि मुख्य समस्या यह है कि हमें सही जानकारी नहीं है.

किचन गार्डनिंग के तहत किसी भी तरह से पौधे को उगाने या ग्रो करने के लिए हमें जिस मिट्टी अथवा soil media की जरूरत होती है, उसे आसानी से घर पर बनाया जा सकता है. आलू की ऑर्गेनिक खेती या आलू के पौधे (Potato plant) को उगाने के लिए हमें जिस तरह की मिट्टी आवश्यकता होती है उसे बनाने के लिए हमें इन चीजों की जरूरत होती है- 

साधारण उपजाऊ गार्डन मिट्टी02 भाग
गोबर/वर्मी कम्पोस्ट खाद03 भाग
कोकोपीट02 भाग
नदी की रेत/मोरंग03 भाग
नीम खली300 ग्राम
सरसों खली400 ग्राम
बोन मील500 ग्राम
नोट- उपरोक्त बताई गई मात्रा 12 X 12 X 12 से 18 X 18 X 18 इंच के गमले या ग्रो बैग के अनुसार ली गई है.

सुझाव-

  • किचन गार्डनिंग में विशेष तौर पर कीटाणु नाशक के रूप में नीम खली ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर का उपयोग किया जाता है. आप इसके स्थान पर केमिकल आधारित फर्टिलाइजर का उपयोग भी कर सकते हैं. लेकिन प्रश्न यह है कि आप आर्गेनिक आलू खाना चाहते हैं या केमिकल आधारित.

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  • उपरोक्त सभी बताये गए घटकों को मात्रा अनुसार आपस में मिलकर वांछित मिट्टी तैयार कर लेनी है. इसके बाद ही मिट्टी में अंकुरित आलूओं को गमलों या ग्रो बैग में रोपित/लगाया जाता है.
  • आलू के पौधे को पनपने के लिए मिटटी का pH मान 06 से 07 के बीच होना जरूरी होता है और रोपने के बाद गमलों या ग्रो बैग पर सीधी धूप का पड़ना जरूरी है.

बुवाई के लिए आलूओं का चुनाव-

बुवाई के हमें उन आलूओं का चुनाव करना होता है जिनपर अपने आप अंकुरण होने लगता है. अमूमन जब बाजार से जब आलू घर पर आता है तो कुछ दिनों बाद कुछ आलूओं में अपने आप अंकुरण स्थान- आँख से अंकुरण होने लगता है. इन्ही आलूओं का चयन किया जाता है.

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यदि आलू आकार में छोटा है तो सीधे रोप दिया जाता है, वहीँ यदि आलू का आकार बड़ा है तो इसे 02 से 03 टुकड़ों में काट लिया जाता है, बिना अंकुरण स्थान को नुकसान पहुंचाए.

गमले में आलू की खेती की विधि (आलू बोने की विधि)-

गमलों या ग्रो बैग में आलू रोपण विधि बहुत ही आसान है और किसी के भी द्वारा इसे सम्पन्न किया जा सकता है-

  • सबसे पहले निर्धारित गमले या ग्रो बैग में लगभग 60% तैयार soil media (मिट्टी) को भर लिया जाता है. इसके बाद मिट्टी से भरे गमले या ग्रो बैग में अंकुरित आलूओं को लगभग 01 इंच अन्दर रोप (दबा) दिया जाता है.
  • रोपने के बाद आलूओं को आधे इंच मिटटी से जरूर ढक दें क्योंकि आलू के पौधों के लिए यह प्रक्रिया जरूरी है. मिटटी से ढक देने के बाद गमले या ग्रो बैग में अच्छे से पानी देना होता है. पहली बार में पानी इतना दें जब तक पानी गमले या ग्रो बैग से बाहर न निकलने लगे. इसके बाद पानी आपको तब ही देना है जब गमले या ग्रो बैग की मिटटी सूखी दिखाई दे.
  • लगभग 15 दिनों के बाद आलू के पौधे मिटटी के ऊपर अच्छे से निकल चुके होंगे, इसके बाद पौधों की निचली पत्तियों को काट/छांट दें, काट/छांट के बाद गमले या ग्रो बैग में 30% मिटटी भर दें और पानी दे दें.

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  • इतना करने के बाद पुन: 12 से 15 दिनों के बाद शेष बची हुई 10% मिटटी भी गमले या ग्रो बैग में भर कर पानी दे दें. इसके बाद आपको पानी आपको इतना ही देना है जिसे मिटटी में नमी बनी रहे, साथ ही पौधों पर होने वाले रोग आदि पर ध्यान देने की आवश्यकता होती है.

सुझाव-

  • यदि आप 12 इंच के गमले या ग्रो बैग में आलू रोप रहे हैं तो अधिक से अधिक 7 से 8 अंकुरित आलू ही रोपे. 15 इंच के गमले या ग्रो बैग में तो अधिक से अधिक 8 से 10 अंकुरित आलू ही रोपे जा सकते हैं. यदि इससे ज्यादा आलू रोपते हैं तो हार्वेस्टिंग के समय आपको छोटे-छोटे आलू ही प्राप्त होंगे, जिससे आपकी की गई मेहनत का परिणाम सुखद नहीं प्राप्त हो सकेगा.
  • किचन गार्डनिंग या टेरेस गार्डनिंग के तहत छोटे स्तर पर ग्रो बैग या गमले में आलू की पैदावार करने के लिए चिप्सोना आलू का चयन बेहतर एक विकल्प है. क्योंकि पछेती में आलू की यह किस्म झुलसा रोग प्रतिरोधी होती है और सर्दियों के मौसम में पाला सहने की क्षमता रखने के साथ चिप्सोना किस्म अच्छा उत्पादन भी देती है.

आलू की खेती में ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर व रोगाणुनाशक (Fertilizers in Potato Cultivation)-

एक बेहतरीन ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर और रोगाणुनाशक जिसका निर्माण हम अपने घर पर आसानी से और कम कीमत पर तैयार कर सकते हैं. इसका इस्तेमाल करने से आपके आलू के पौधों की ग्रोथ बहुत अच्छी तरह से होती है. घर पर ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर बनाने के लिए सिर्फ एक चीज की जरूरत होती है और वह है- नीम खली, नीम का तेल और सरसों की खली.

02 लीटर पानी में करीब 07 से 10 ml नीम के तेल को मिलाकर पौधे व उसकी पत्तियों पर स्प्रे करना होता है, आप 20 दिनों के अंतराल पर इस ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर का उपयोग कर सकते हैं. नीम खली को आप सीधे पौधे की जड़ में गुड़ाई कर दे सकते हैं. 

साथ ही 20 से 30 ग्राम सरसों की खली को 02 लीटर पानी में 24 घंटे भिगोकर जो मिश्रण तैयार होता है उसे सीधे या छानकर आलू के पौधे को 15 दिन में एक बार ही देना होता है. इसे देने से आलू के पौधे को आवश्यक पोषक तत्व मिलते हैं और जिससे आलू का कंद बड़ा और स्वादिष्ट भी बनता है.

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आलू की खेती के तहत आलू के पौधे में लगने वाले रोग (Disease in Potatoes Plant)-

मौलिक तौर पर अधिकांश सब्जियों के पौधों पर पौधों को नुकसान पहुचाने वाले कीटों का आक्रमण होता ही होता है, अगर समय रहते इन कीटों का समुचित समाधान/निपटान नहीं किया जाए तो ये कीट पौधे का सम्पूर्ण सर्वनाश करने में भी सक्षम होते हैं.

आलू-में-लगने-वाले-रोग-व-समाधान

आलू के पौधे पर भी पौधे को क्षति पहुचाने वाले कीट एक बार जरूर आक्रमण करते हैं. अमूमन आलू के पौधे में कीटों की वजह से कुछ रोग देखने को मिलते हैं. जैसे-

आलू के पौधे की पत्तियों का सफ़ेद हो जाना, जाला आदि लग जाना तथा पौधे के स्प्राउट का काला होकर स्वत: ही गिर जाना.

अगर आलू के पौधे की पत्तियां सफ़ेद हो रही हैं साथ ही यदि पौधे के स्प्राउट काले होकर स्वत: ही गिर रहे है या पौधे पर मकड़ी जाला लगा दिख रहा है तो समझ लीजिए कि आपके आलू के पौधे पर कीटों का आक्रमण हुआ है, इनसे निजात पाने के लिए आप पौधे पर कीटनाशक (ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर) का हर सप्ताह में एक बार अच्छे से जरूर करें.

ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर (कीटनाशक) बनाने की विधि ऊपर बताई जा चुकी है. इसके साथ ही जब आपको लगे कि पौधा कीट मुक्त हो चुका है तो ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर (कीटनाशक) का उपयोग 20 दिन में एक बार ही करें.

पत्तियों का रंग पीला पड़ जाना अथवा मरोडिया रोग की समस्या

यदि पौधे की पत्तियों का रंग समय से पहले पीला हो जा रहा है व पौधे में अच्छी ग्रोथ नहीं दिख रही है तो समझ जाइए कि ओवर वाटरिंग की वजह से पौधे की मिटटी में पोषक तत्वों की कमी हो गयी है, पौधे की मिट्टी में हल्की गुड़ाई के बाद वर्मी कम्पोस्ट खाद के साथ नीम खली मिलाकर दें.

मरोडिया रोग से निपटने के लिए 07 भाग साफ पानी, 02 भाग हैड्रोजन परऑक्साइड के साथ 01 भाग नीम का तेल का मिश्रण बनाकर पौधे पर सुबह शाम लगातार कम से कम 03 दिन छिडकाव करें. आपके पौधे जल्द ही स्वस्थ्य हो जायेंगे. इसके साथ पौधे की जड़ में थोड़ी मात्रा में हल्दी पानी से बना घोल भी डालें. इस घोल का प्रयोग महीने में केवल 02 बार ही कर सकते हैं.

पौधे में अच्छी ग्रोथ का न होना तथा पौधा बढ़ते-बढ़ते मुरझा जाना.

यदि आलू का पौधा बढ़ते-बढ़ते मुरझा रहा है तो समझ जाइए कि पौधे के गमले का पानी निकासी छिद्र (ड्रेनेज होल) बंद हो गया है जिससे गमले में अतिरिक्त पानी ठहर रहा है. इसका तुरंत निपटान/समाधान किया जाना बेहद जरूरी है अन्यथा पौधे की जड़ें पानी में गल जाएंगी और पौधा मर जाएगा.

आलूओं को हार्वेस्ट करना (Potato Harvesting)-

यदि आपने सब कुछ चरणबद्ध तरीके से किया है तो लगभग 80 से 120 दिनों में आपके आलू हार्वेस्ट/कटाई के लिए लगभग तैयार हो चुके होंगे, आप आलू की खेप की हार्वेस्टिन्ग/कटाई करना शुरू कर सकते हैं। किचन गार्डनिंग या टेरेस गार्डनिंग के तहत तैयार आलूओं को एक बार में ही हार्वेस्ट किया जाता है.

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पूरी तरह से ऑर्गेनिक प्रक्रिया द्वारा उगाए गए आलू, खाने में बेहद स्वादिस्ट होने के साथ-साथ पर्याप्त पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं, यदि आप healthy food खाने के शौकीन हैं तो ये ऑर्गेनिक आलू आपको बहुत पसंद आएंगे. 

FAQ.

आलू की खेती में कौन कौन सी खाद डालें?

किचन गार्डनिंग या टेरेस गार्डनिंग के तहत आलू की सफल खेती करने के लिए साधारण उपजाऊ गार्डन मिट्टी में गोबर/वर्मी कम्पोस्ट खाद, कोकोपीट, नदी की रेत/मिट्टी, नीम खली, सरसों खली और बोन मील आदि को मिलाकर तैयार soil media में आसानी से की जा सकती है.

चूँकि आलू एक कंद वाली सब्जी/फसल है इसलिए आलू की खेती में गोबर/वर्मी कम्पोस्ट खाद के साथ कैल्शियम और फास्फोरस जैसे घटक की महत्वपूर्ण भूमिका होती है.

आलू की खेती कितने महीने की होती है?

अमूमन आलू की उपज/फसल 80 से 120 दिन में पूरी तरह से परिपक्व हो जाती है. परिपक्वता का समय आलू की किस्मों पर भी निर्भर करता है.

आलू की बुवाई कौन से महीने में होती है?

सितम्बर के आखिरी सप्ताह से मध्य नवम्बर तक अगेती में (फसल अवधि- 85 से 100 दिन) तथा मध्य नवम्बर से जनवरी के पहले सप्ताह तक पछेती में (फसल अवधि- 90 से 110 दिन)

आलू की अच्छी पैदावार के लिए क्या करें?

गमले या ग्रो बैग में आलू की अच्छी पैदावार के लिए सबसे महत्वपूर्ण घटक है मिट्टी व आलू की खेती के लिए खाद (soil media) का चुनाव करना. इसके बाद पानी की संतुलित मात्रा और रोग आदि पर नियंत्रण.

घर पर आलू की जैविक खेती कैसे करें?

किचन गार्डेन/टेरेस गार्डेन के तहत आलू की जैविक खेती की पूरी जानकारी के लिए पोस्ट को पूरा पढ़ें.

आलू उगाने के लिए कौन सी मिट्टी सबसे अच्छी होती है?

किचन गार्डेन के तहत आलू को उगाने के लिए 03 भाग गार्डेन मिट्टी, 05 भाग मोरंग तथा 02 भाग खाद से तैयार की गई मिट्टी बेहतर परिणाम देती है.

अंत में-

स्वास्थ्य की दृष्टी से केमिकल रहित सब्जियां खाना हमारे शरीर को हमेशा बेहतर बनाता है और किचन गार्डनिंग व टेरेस गार्डनिंग के तहत आलू को तैयार करना भी थोड़ी देख-रेख के बाद आसानी से हो जाता है. यदि आप चाहते/चाहती हैं कि आप भी ऑर्गेनिक सब्जियों का लुफ्त उठा पाएं तो आलू को अपने किचन गार्डेन या टेरेस (छत) गार्डेन में जरूर उगाएं.

हमारा उद्देश्य सभी किचन गार्डनिंग व टेरेस गार्डनिंग (बागवानी) प्रेमियों को बेहतर से बेहतर जानकारी प्रदान करना है, जिससे वे अपनी बागवानी योग्यताओं को बेहतर से बेहतरीन बना सके और अपने द्वारा तैयार की गई ऑर्गेनिक सब्जियों से लाभ उठा सकें.

आशा है आपको इस लेख ‘गमले में आलू की खेती कैसे करें’ से किचन व टेरेस गार्डनिंग के तहत आलू की उन्नत खेती के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी जरूर मिली होगी, यदि आप potato cultivation के बारे में और भी जानना चाहते है तो हमारे Telegram चैनल से जुड़ें. साथ ही यदि कुछ छूट गया हो तो कृपया comment box में जरूर लिखें. लेख अच्छा लगा हो तो इसे अपने दोस्तों के साथ share करना बिल्कुल न भूलें. अभी तक के लिए इतना ही—-

“शुभकामनाएं! आपकी कामयाब और सफल बागवानी के लिए”

धन्यवाद!

जय हिंद! जय भारत!

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