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किचन गार्डेन में धनिया की उन्नत खेती | Improved Cultivation of Coriander in Kitchen Garden

किचन गार्डेन में धनिया की उन्नत खेती (Improved Cultivation of Coriander) की विस्तृत जानकारी, धनिया की उन्नत किस्में, बुवाई का समय, धनिया उगाने के लिए मिट्टी तैयार करना, धनिया में लगने वाले रोग/परजीवी, घर पर ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर बनाने की विधि, धनिया हार्वेस्ट करने की प्रक्रिया

मौजूदा समय में शायद ही कोई ऐसा घर होगा जहां धनिया का उपयोग न किया जाता हो. आमतौर पर धनिया का उपयोग भोजन को स्वादिष्ट, सुगंधित और सुन्दर (सिजिनिंग) बनाने के लिए किया जाता है। धनिया सही मायनों में एक ऐसी बूटी है, जिसमें हमारे शरीर को ठीक करने के ढेर सारे गुण विद्यमान रहते हैं.

जिस कारण धनिया को घरेलू औषधीय के तौर पर भी इस्तेमाल किया जा सकता है, पर विडंबना तो यह है हममें से अधिकतर को इसके बारे कुछ ख़ास पता नहीं होता.

धनिया जिसे सिलैंट्रो, पार्सले तथा अंग्रेजी में कोरिएंडर (Coriander) के नाम से जाना जाता है, को निश्चित मात्रा में नियमित रूप से सेवन करने के बहुत ढेर सारे फायदे मिलते हैं. आर्गेनिक तरीके उगाई गई धनिया में विभिन्न तरह के एंटीऑक्सिडेंट होने के साथ कोलेस्ट्रॉलहाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्याओं को कम करने के गुण प्रचुर मात्रा में विद्यमान होते हैं.

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प्राकृतिक तरीके से उपजी अथवा उगाई गई धनिया पोटेशियम, मैग्नीशियम, कैल्शियम, मैंगनीज एवं लोहे का भी अच्छी स्रोत भी मानी जाती है। धनिया का सेवन करने से कम भूख लगना, पाचन में समस्या और अनचाहे संक्रमण से निजात पाने में सहूलियत मिलती है. 

यदि आप भी बागवानी के शौक़ीन है और अपने किचन गार्डेन में ग्रो बैग अथवा गमले में आर्गेनिक धनिया की उन्नत खेती कर धनिया उगाना और उसका सेवन करना चाहते हैं, तो यह पोस्ट आपको पूरी तरह से समर्पित है. धनिया की खेती थोड़े समय की खेती होती है.

यदि चरणबद्ध तरीके से किचन गार्डेन/टेरेस गार्डेन में धनिया की उन्नत खेती की जाए तो यह ऑर्गेनिक धनिया बाजार में मिलने वाली धनिया की अपेक्षा आपके शरीर के लिए काफी हितकर जरूर साबित होगी.

तो प्रश्न यह है कि किचन गार्डेन में धनिया की वैज्ञानिक खेती करने के लिए किन-किन चीजों व घटकों की आवश्यकता होती है? साथ ही बेहतर तरीके से आर्गेनिक धनिया उगाने के लिए किस तरह की मिट्टी का उपयोग किया जाता है? तो चलिए शुरू करते हैं घर पर धनिया उगाने की प्रक्रिया की-

अनुक्रमिका

धनिया की उन्नत खेती के लिए बीज (Seeds for Improved Cultivation of Coriander)-

आज बाजार में धनिया के पौधे तैयार करने के लिए कई किस्मों के बीज मिलते हैं. किचन गार्डनिंग व टेरेस गार्डनिंग (छत पर बागवानी) के तहत गमलों या ग्रो बैग में धनिया की अच्छी उपज लेने के लिए आप किसी भी धनिया किस्म के बीजों का चयन कर सकते हैं.

धनिया का पौधा 10 डिग्री सेंटीग्रेड से कम तापमान व 37 डिग्री सेंटीग्रेड से ज्यादा तापमान पर अच्छे से पनप नहीं पाता या विकसित नहीं हो पाता है. इसलिए यदि आप किचन गार्डेन के तहत गमलों में धनिया के पौधे लगाकर अच्छे धनिया  की पैदावार करना चाहते हैं तो यह जरूरी है कि आप मौसम और तापमान का विशेष ध्यान रखें.

कहां से लें –

अमूमन धनिया के बीज आपको अपने क्षेत्र के सहकारी व प्राइवेट बीज भंडार से आसानी से मिल जाते हैं. आप इसके बीजों को ऑनलाइन भी मंगा सकते हैं लेकिन ऑनलाइन तभी खरीदें जब आपको धनिया के बीजों की अच्छी पहचान करना आता हो.

ऑनलाइन हाइब्रिड धनिया बीज खरीदने के लिए नीचे table देखें-

सामग्री
हाइब्रिड धनिया बीज
कोकोपीट
वर्मी कम्पोस्ट
नीम खली
स्टोन पाउडर

धनिया की उन्नत खेती के लिए बुवाई का समय (Coriander Time of Sowing)-

अमूमन धनिया एक ऐसी वनस्पति है जो साल के 12 महीनों में बाजार में देखने की आसानी से मिलती है. धनिया की इस उपलब्धता का मुख्य कारण है धनिया की उपज/बुवाई का समय. एक साल में धनिया को लगभग सभी मौसमों में पारंपरिक रूप से लगाया जाता है साथ ही व अगेती के अंतर्गत भी लगाया जाता है-

  1. 12 फ़रवरी से 31 मार्च तक
  2. 15 जून से जुलाई (वर्षा ऋतू में चयनित स्थान पर पानी आदि का जमाव न हो)
  3. 15 अक्टूबर से 20 नंबवर तक (पाले आदि से बचाव के लिए बुआई नवम्बर के द्वितीय सप्ताह में कर सकते हैं)

धनिया बोने की विधि (Coriander Planting Method)-

किचन/टेरेस गार्डेन में धनिया की बुवाई के लिए 02 तकनीकों का उपयोग किया जाता है-

  1. साबुत धनिया के बीज को दो भाग में तोड़कर सीधे मिट्टी के ऊपर फैलाकर बीज को हल्की मिट्टी से ढक दिया जाता है और फिर पानी से हल्की सिंचाई की जाती है.
  2. साबुत धनिया के बीज को दो भाग में तोड़कर बीज को पानी की सहायता से लगभग 24 से 72 घंटो के लिए अँधेरी जगह पर किसी सील पैक डिब्बे में नम करने के उद्देश्य से रख दिया जाता है. करीब 03 से 04 दिन में ही धनिया के बीज अंकुरित हो जाते हैं. अंकुरण के बाद इन्हें सीधे तैयार मिट्टी में रोप दिया जाता है.

धनिया की उन्नत खेती में उन्नत किस्में (Improved Varieties Of Coriander)

किचन गार्डनिंग व टेरेस गार्डनिंग (छत पर बागवानी) के तहत धनिया की सामान्य किस्मों को बड़े स्तर की खेती के लिए उपयोग (खेत आदि) में लिया जाता है. हालांकि इन किस्मों को गमले या ग्रो बैग में भी लगाया जा सकता है और कुछ हद तक उपज भी ली जा सकती है, लेकिन किचन गार्डनिंग में मुख्य रूप से धनिया  की हाइब्रिड किस्मों को ही लिया जाता है. ये सामान्य और हाइब्रिड किस्में इस प्रकार हैं-

  1. हिसार सुगंध (मध्यम ऊंचाई की धनिया किस्म- विशेषकर धनिया दाने का उत्पादन करने के लिए उपयुक्त)
  2. पंत हरितमा (हरी पत्तियां एवं दानों दोनों के लिए उपयुक्त)
  3. आर सी आर 41 (हरी पत्तियों के लिए यह उपयुक्त किस्म)
  4. जी सी 2 (हरी पत्तियों के लिए यह उपयुक्त किस्म)
  5. जे.डी 1 (सिंचित एवं असिंचित के लिए उपयुक्त मध्यम ऊंचाई की धनिया किस्म)
  6. सी एस 6 (मध्यम ऊंचाई की धनिया किस्म)
  7. सिम्पो एस 33 (बीज के लिये उपयुक्त)
  8. कुंभराज (मध्यम ऊंचाई की धनिया किस्म)
  9. आर सी आर 446 (मध्यम आकार के दाने, शाखायें सीधी, अधिक हरी पत्तियों के लिए उपयुक्त, असिंचित के लिए उपयुक्त)
  10. आर सी आर 728 (असिंचित एवं हरी पत्तियों के लिये उपयुक्त)
  11. आर सी आर 684 (बोनी धनिया किस्म)

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धनिया की उन्नत खेती के लिए मिट्टी तैयार करना (Preparation of Soil Media)-

किचन गार्डनिंग के तहत उच्च स्तर की बागवानी करने में सबसे अहम भूमिका निभाती है- soil media मतलब पौधों की मिट्टी की. आमतौर पर हममें से कई लोग इस चीज पर कोई खास ध्यान नहीं देते है, बस पौधों को सीधे गमलो की मिट्टी में लगा देते हैं और पानी के साथ कुछ बेसिक खाद आदि देकर अपना पीछा छुड़ा लेते हैं, 

इसके बाद इंतजार करते हैं कि हमारा लगाया गया पौधा जल्द से जल्द बड़ा होकर अच्छे फल-फूल अथवा वांछित सब्जी देना शुरू कर दे, लेकिन जब पौधा अच्छे फल-फूल अथवा वांछित सब्जी नहीं देता तो कहते हैं कि वो पौधा ही ख़राब है. समस्या यह नहीं है कि पौधा ख़राब है, बल्कि मुख्य समस्या यह है कि हमें सही जानकारी नहीं है.

किचन गार्डनिंग के तहत किसी भी तरह से पौधे को ग्रो करने के लिए हमें जिस मिट्टी या soil media की जरूरत होती है, उसे आसानी से घर पर बनाया जा सकता है. धनिया के पौधे (Coriander Plants) को उगाने के लिए हमें जिस तरह की मिट्टी आवश्यकता होती है उसे बनाने के लिए हमें इन चीजों की जरूरत होती है- 

  1. साधारण उपजाऊ गार्डन मिट्टी या कोकोपीट- 06 भाग
  2. गोबर/वर्मी कम्पोस्ट खाद- 04 भाग
  3. नीम खली- 40 से 50 ग्राम
  4. पत्थरों का चूरा (Stone Dust Powder)- 01 मुटठी (इसे अनिवार्य रूप से जरूर मिलाए, इसको मिलाने से मिटटी में कैल्सियम, फास्फोरस और नाइट्रोजन की भरपूर मात्रा मिटटी में भर जाती है, जो स्वस्थ्य धनिया के पौधे के विकास के लिए जरूरी है.)

नोट- उपरोक्त बताई गई मात्रा 06 इंच उंचा और 12 से 20 इंच लम्बा व 06 इंच चौड़े गमले या ग्रो बैग के अनुसार ली गई है. मिट्टी का pH 6.5 से 7.5 होना जरूरी है.

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सुझाव-

  • किचन गार्डनिंग में विशेष तौर पर कीटाणु नाशक के रूप में नीम खली ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर का उपयोग किया जाता है. आप इसके स्थान पर केमिकल फर्टिलाइजर का उपयोग भी कर सकते हैं. लेकिन प्रश्न यह है कि आप आर्गेनिक फसल खाना चाहते हैं या केमिकल आधारित.
  • उपरोक्त सभी बताये गए घटकों को मात्रा अनुसार आपस में मिलकर वांछित मिट्टी तैयार कर लेनी है. इसके बाद ही मिट्टी में धनिया  के पौधों को गमलों या ग्रो बैग में स्थानांतरित (transplant) कर लगाया जाता है.
  • किसी भी मौसम में धनिया के पौधे को पनपने के लिए मिटटी का pH मान 06 से 07 के बीच होना जरूरी होता है.

ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर और रोगाणुनाशक-

एक बेहतरीन ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर और रोगाणुनाशक जिसका निर्माण हम अपने घर पर आसानी से और कम कीमत पर तैयार कर सकते हैं. इसका इस्तेमाल करने से आपके धनिया के पौधों की ग्रोथ बहुत अच्छी तरह से होती है. घर पर ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर बनाने के लिए सिर्फ एक चीज की जरूरत होती है और वह है- नीम खली, नीम का तेल और सरसों की खली.

02 लीटर पानी में करीब 07 से 10 ml नीम के तेल को मिलाकर पौधे व उसकी पत्तियों पर स्प्रे करना होता है, आप 15 दिनों के अंतराल पर इस ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर का उपयोग कर सकते हैं. नीम खली को आप सीधे पौधे की जड़ में गुड़ाई कर दे सकते हैं. 

साथ ही 20 से 30 ग्राम सरसों की खली को 02 लीटर पानी में 24 घंटे भिगोकर जो मिश्रण तैयार होता है उसे सीधे या छानकर धनिया के पौधे को 15 दिन में एक बार ही देना होता है. इसे देने से धनिया  के पौधे अधिक मात्रा में पत्तियों से युक्त घने हो जाते हैं.

धनिया की उन्नत खेती में पानी की मात्रा संतुलित करना-

जब धनिया के पौधों में फूल आने शुरू हो जाते है तो सप्ताह में एक बार या महीने में 03 बार सरसों खली से बने मिश्रण को जरूर दें. साथ फूल आने के बाद पौधे को बस उतना ही पानी देना है, जितने में उसकी मिट्टी में नमी बनी रहे. सर्दियों के मौसम में गमले आदि में लगे पौधों को 02 से 03 दिन के अंतराल पर पानी दिया जाता है. 

इसके साथ ही जैसे जैसे पौधे की शाखाएं बड़ी होकर फैलती हैं तो इन शाखाओं का उचित प्रबन्धन, अगर आप धनिया के फल लेना चाहते हैं तो अनिवार्य रूप से जरूर करें, क्योंकि इन्ही शाखाओं में पहले धनिया फूल और फिर फल (धनिया) लगती है.

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वहीं यदि आप केवल हरी धनिया का ही उपभोग करना चाहते हैं तो 03 इंच का पौधा हो जाने के बाद इसकी हर्वेटिंग करना शुरू कर सकते हैं.

नोट- धनिया के बीजों का अंकुरण होने के लिए 25 से 27 डिग्री सेंटीग्रेट तापमान अच्छा होता है।

धनिया के पौधे में लगने वाले रोग-

मौलिक तौर पर अधिकांश सब्जियों के पौधों पर पौधों को नुकसान पहुचाने वाले कीटों का आक्रमण होता ही होता है, अगर समय रहते इन कीटों का समुचित समाधान/निपटान नहीं किया जाए तो ये कीट पौधे का सम्पूर्ण सर्वनाश करने में भी सक्षम होते हैं.

धनिया के पौधे पर भी पौधे को क्षति पहुचाने वाले कीट एक बार जरूर आक्रमण करते हैं. अमूमन धनिया के पौधे में कीटों की वजह से कुछ रोग देखने को मिलते हैं. जैसे-

  1. धनिया के पौधे की पत्तियों का सफ़ेद हो जाना.
  2. पत्तियों का रंग पीला पड़ जाना.
  3. पौधे पर जाला आदि लग जाना,
  4. पौधे में अच्छी ग्रोथ का न होना.
  5. पौधा बढ़ते-बढ़ते मुरझा जाना.

ये कुछ रोग हैं जो किचन गार्डनिंग या टेरेस गार्डनिंग के तहत धनिया के पौधे में ख़ास तौर पर देखने को मिलते हैं. इसका समाधान यह है कि…..

  • अगर धनिया के पौधे की पत्तियां सफ़ेद हो रही हैं साथ ही यदि पनपती धनिया की पत्तियों पर या पौधे पर मकड़ी जाला लगा दिख रहा है तो समझ लीजिए कि आपके धनिया के पौधे पर कीटों का आक्रमण हुआ है, इनसे निजात पाने के लिए आप पौधे पर कीटनाशक (ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर) का हर सप्ताह में एक बार अच्छे से जरूर करें.
  • ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर (कीटनाशक) बनाने की विधि ऊपर बताई जा चुकी है. इसके साथ ही जब आपको लगे कि पौधा कीट मुक्त हो चुका है तो ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर (कीटनाशक) का उपयोग 15 दिन में एक बार ही करें. कीटनाशक उपयोग करने के बाद पौधों को वर्मी कम्पोस्ट खाद जरूर दें.
  • वहीं यदि पौधे की पत्तियों का रंग समय से पहले पीला हो जा रहा है व पौधे में अच्छी ग्रोथ नहीं दिख रही है तो समझ जाइए कि पौधे की मिटटी में पोषक तत्वों की कमी हो गयी है, पौधे की मिट्टी में हल्की गुड़ाई के बाद वर्मी कम्पोस्ट खाद व खाद में नीम खली मिलाकर दें.
  • इसके साथ ही यदि धनिया का पौधा बढ़ते-बढ़ते मुरझा जा रहा है तो समझ जाइए कि पौधे के गमले का पानी निकासी छिद्र (ड्रेनेज होल) बंद हो गया है जिससे गमले में अतिरिक्त पानी ठहर रहा है. इसका तुरंत निपटान/समाधान किया जाना बेहद जरूरी है अन्यथा पौधे की जड़ें पानी में गल जाएंगी और पौधा मर जाएगा.

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धनिया को हार्वेस्ट करना-

यदि आपने सब कुछ चरणबद्ध तरीके से किया है तो लगभग 30 से 42 दिनों में आपके धनिया  हार्वेस्ट/कटाई के लिए लगभग तैयार हो चुके होंगे, आप धनिया की पहली खेप की हार्वेस्टिन्ग/कटाई करना शुरू कर सकते हैं। किचन गार्डनिंग या टेरेस गार्डनिंग के तहत तैयार हरी धनिया को जरूरत के मुताबिक हार्वेस्ट कर सकते हैं. 

पूरी तरह से ऑर्गेनिक प्रक्रिया द्वारा उगाई गई धनिया, खाने में बेहद स्वादिस्ट होने के साथ-साथ पर्याप्त पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं, यदि आप स्वाद के शौकीन हैं तो ये ऑर्गेनिक धनिया आपको बहुत पसंद आएंगे. 

धनिया की खेती के तहत अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)-

घर पर धनिया की खेती कितने दिन में तैयार हो जाती है?

किचनगार्डेन/टेरेस गार्डेन में बीजारोपण के लगभग 30 से 42 दिनों बाद ऑर्गेनिक तरीके से उगाई गई धनिया हार्वेस्ट/कटाई के लिए तैयार हो जाती है.

साल में धनिया की बुवाई कब करें?

1. 12 फ़रवरी से 31 मार्च तक
2. 15 जून से जुलाई (वर्षा ऋतू में चयनित स्थान पर पानी आदि का जमाव न हो)
3. 15 अक्टूबर से 20 नंबवर तक (पाले आदि से बचाव के लिए बुआई नवम्बर के द्वितीय सप्ताह में कर सकते हैं)

अच्छी उपज के लिए धनिया में कौन सा खाद डालें?

किचन/टेरेस गार्डेन के धनिया की उन्नत खेती के लिए नीम खली व वर्मी कम्पोस्ट या गोबर की सड़ी खाद ही पर्याप्त है. इनके अलावा/अतिरिक्त किसी अन्य फर्टिलाइजर की आवश्यकता नहीं पड़ती. हां यदि आप experiment करना चाहते हैं तो विभिन्न खादों का उपयोग कर सकते हैं.

अंत में-

स्वास्थ्य की दृष्टी से केमिकल रहित सब्जियां खाना हमारे शरीर को बेहतर बनाता है और किचन गार्डनिंग व टेरेस गार्डनिंग के तहत हरी धनिया की उन्नत खेती करना भी थोड़ी देख-रेख के बाद आसान हो जाता है. यदि आप चाहते/चाहती हैं कि आप भी ऑर्गेनिक सब्जियों/मसालों का लुफ्त उठा पाएं तो धनिया को अपने किचन गार्डेन या टेरेस (छत) गार्डेन में जरूर उगाएं.

हमारा उद्देश्य सभी किचन गार्डनिंग व टेरेस गार्डनिंग (बागवानी) प्रेमियों को बेहतर से बेहतर जानकारी प्रदान करना है, जिससे वे अपनी बागवानी योग्यताओं को बेहतर से बेहतरीन बना सके और अपने द्वारा तैयार की गई ऑर्गेनिक सब्जियों से लाभ उठा सकें.

आशा है आपको इस लेख ‘गमले में धनिया की उन्नत खेती कैसे करें’ से किचन व टेरेस गार्डनिंग के तहत धनिया की वैज्ञानिक खेती के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी जरूर मिली होगी, यदि आप अन्य कोई जानकारी पाना चाहते है तो हमारे Telegram चैनल से जुड़ें. साथ ही पोस्ट में यदि कुछ छूट गया हो तो कृपया comment box में जरूर लिखें. तब तक के लिए —-

शुभकामनाएं आपके कामयाब और सफल बागवानी के लिए

धन्यवाद!

जय हिंद! जय भारत!

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