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सफल कारोबारी की खास बातें | Successful Businessman के गुण | Characteristics of a Successful Businessman in Hindi

सफल कारोबारी की खास बातें (Characteristics of a Successful Businessman), बिजनेसमैन के गुण, एक सफल कारोबारी/व्यवसायी कैसे बने?, कारोबार/बिजनेस में सफलता के लक्षण, एसेट और लाइबिलिटी को समझना, लक्षित ग्राहकों की मनोदशा को समझना

अपने बिजनेस/कारोबार में सफल होना कौन नहीं चाहता? स्वाभाविक सी बात है जिसने भी अपना startup शुरू किया है, निश्चित ही वह अपने भविष्य के बारे में चिंतित है और अपनी दूरदर्शिता को दुरुस्त बनाने के लिए आज से ही प्रयास करने आरम्भ कर दिए हैं.

असल में यही शुरुआत उस व्यक्ति को भविष्य में एक सफल कारोबारी (Successful Businessman) की श्रेणी में पहुंचा देती है जो पीढ़ी दर पीढ़ी उसे उन्नति की ओर लेती चली जाती है.

क्या आप जानते हैं कि एक व्यवसाय या कारोबार की शुरूआत कहां से होती है? अगर हां! तो आप अपने विचार comment box में दे सकते हैं. अगर नहीं! तो आज इस पोस्ट के माध्यम से हम उन जानकारियों को साझा करने जा रहे हैं जो किसी भी व्यवसाय को शुरू करने और शिखर तक पहुचाने के लिए जरूरी होती है.

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सफल कारोबारी की खास बातें (Characteristics of a Successful Businessman)

सबसे खास प्रश्न तो यह है कि आखिर सफल व्यवसायी या सफल कारोबारी बनना क्या होता है मतलब किसे कहते हैं? और सफल कारोबारी की खास बातें क्या-क्या होती हैं? तो इसका उत्तर है-

“अपने लक्ष्य को पाने के लिए वांछित वस्तु निर्माण या विशेष सेवा का सामाजिक, व्यवहारिक और व्यापारिक स्तरों पर विस्तार कर विस्तारित घटकों से आय अर्जन (धन अर्जन) किया जाना ही व्यवसाय अथवा कारोबार करना कहलाता है, और जिस व्यक्ति के द्वारा यह किया जाता है उसे सफल कारोबारी, व्यवसायी, उद्यमी या व्यापारी कहा जाता है.”

लेकिन वर्तमान में अधिकांश लोगों के मुताबिक व्यवसाय जिसे बिजनेस भी कहा जाता है का मतलब बिजनेस के मूल अर्थ से बिल्कुल भिन्न देखने को मिलता है, मसलन व्यवसाय की इच्छा (business desire) रखने वाले अधिकतर इच्छुक कारोबारियों/उद्यमियों/उम्मीदवारों की मानसिकता में सबसे पहले कुछ इस तरह के विचार आते हैं,

जैसे- हम अपनी एक दुकान खोलकर/वस्तु निर्माण कर या अपनी सेवा प्रदान कर अपना उद्यम/व्यवसाय (own entrepreneurship) शुरू करेंगे. निश्चित ही यह व्यवसाय शुरू करने की पहली सीढ़ी मानी जा सकती है.

परन्तु समस्या तब आनी शुरू होती जब हममें से कोई इच्छुक उद्यमी/उम्मीदवार व्यवसाय तो स्थापित कर लेता है पर वांछित ग्राहकों को वस्तु, उत्पाद या सेवा को क्रय करने के लिए आकर्षित नहीं कर पाता, जब इस तरह की समस्या दिखाई दे तो यह पूरी तरह से साफ हो जाता है कि…

इच्छुक व्यक्ति ने अपने आपको स्वरोजगार (self employment) की श्रेणी में रखा है, यह व्यवसाय या बिजनेस नहीं है बल्कि इसे केवल self employment ही कहेंगे, और इसी मनोदशा के कारण आज अधिकतर नए start-ups फलने-फूलने की अपेक्षा फेल हो जाते हैं.

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जबकी एक व्यवसायीय/उद्यमी की मानसिकता में हमेशा हलचल बनी ही रहती है कि कैसे वह अपने Products या Services को सभी तक आसानी से पंहुचा पाए और ग्राहक उसके यहां से कभी भी खाली न जा पाए. समझिए! किसी भी व्यवसाय शुरू करने से पहले सबसे पहला काम होता है,

उस बाजार को समझना जहां पर व्यवसाय स्थापित किया जाना है. उसके बाद बाजार में उन उपभोक्ताओं/ग्राहकों की पहचान कर उनकी मनोदशा को समझना होता है. इसके बाद ही शुरू किया जाता है वस्तु उत्पाद निर्माण या सेवाओं का प्रदर्शन करना.

बाजार में उत्पाद उतारने या सेवाओं का विस्तार करने से पूर्व हमें अपने उत्पाद अथवा सेवाओं की विस्तृत मार्केटिंग व आंशिक (Limited) रूप से उत्पाद का सैम्पल वितरण भी करना जरूरी है क्योंकि आज का मार्केट लगभग पूरी तरह से मार्केटिंग आधारित हो चुका है,

और बेहतर तरीके से की गई मार्केटिंग किसी भी नए व्यवसाय को आसानी से सफलता दिलाने में सक्षम है, बशर्ते आपके द्वारा निर्मित उत्पाद या सेवाओं की गुणवत्ता बाजार में मौजूद अन्य सभी से सर्वोत्तम हो.

सफल कारोबारी के लिए व्यवसाय के प्रकार (Types of Business)-

मौजूदा बाजार में अभी 02 तरह के व्यवसाय देखने को मिलते हैं जैसा कि परिभाषा में वर्णित किया गया है-

  1. वस्तु/उत्पाद निर्माण व्यवसाय (Products Manufacturing Business)
  2. सेवा प्रदान व्यवसाय (Service Business)

वस्तु/उत्पाद निर्माण (Product Manufacturing Business)-

यहां वस्तु/उत्पाद निर्माण व्यवसाय से आशय है Manufacturing से, जिसके अंतर्गत हमारे उपयोग में ली जाने वाली लगभग सभी वस्तुएं आ जाती हैं. Manufacturing Business के अंतर्गत कच्चे माल से फिनिश उत्पाद बनाने या तैयार करने और फिर बाजार में बेचने का काम किया जाता है. Manufacturing Business की ख़ास बात यह है कि इस प्रकार के व्यवसाय या कारोबार में एक सीमित निवेश की आवश्यकता होती है…

साथ ही व्यवसाय के इस प्रकार में मुनाफा अधिक मिलने की सम्भावना हमेशा बनी ही रहती हैं क्योंकि बाजार में हमेशा उतार चढ़ाव चलता रहता है. चूंकि Products Manufacturing में फिनिश उत्पाद की कीमत कच्चे माल पर ही निर्भर करती है इसलिए जब Manufacturing Business में products की कीमते बढती हैं…

तो व्यवसाय बाकी के अन्य स्तरों पर भी उत्पाद की कीमते बढ़ जाती हैं. शरुआती आंकलन पर इच्छुक उम्मीदवारों को लग सकता है कि Products Manufacturing Business में लागत अन्य स्तरों से अधिक होता है, पर यहां पर बड़ा निवेश केवल एक ही बार होता है, और मुनाफा हर बार.

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सेवा प्रदान व्यवसाय (Service Business)-

चूंकि Products Manufacturing Business के अंतर्गत उत्पादों का निर्माण बड़े स्तर पर होता है, जिस कारण Manufacturing Units अपने उत्पादों की बिक्री के लिए कई सेवाओं को आमंत्रित करती है. ये आमंत्रित सेवादाता Manufacturing Units से उत्पाद को बाजार से सस्ते मूल्य पर खरीद कर अपने तरीकों से बाजार में बिक्री करते हैं, जिस कारण बाजार में उत्पादों के मूल्य में उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है.

मतलब मूल रूप से इसी को मार्केटिंग कहा जा सकता है. मतलब यहां उत्पादक उत्पाद का निर्माण नहीं कर रहा है बल्कि उत्पाद को Manufacturing Units से खरीद कर उत्पाद पर अपनी ब्रांडिंग कर बाजार में बेचने की कोशिश कर रहा है, कुल मिलाकर आम जन के लिए सेवा प्रदान करने की कोशिश कर रहा है.

सेवाओं प्रदान करने वाले व्यवसाय या कारोबार में निवेश की लागत तय नहीं की जा सकती क्योंकि सेवा प्रदान व्यवसाय पूरी तरह से बाजार और ग्राहक आधारित होता है. साथ ही सेवा प्रदान व्यवसाय के अंतर्गत किसी भी प्रकार व्यवसाय/कारोबार को आसानी से शुरू किया जा सकता है.

मौजूदा मार्केट में आप जो भी दुकाने देखते हैं उनमें से लगभग 98% दुकाने सेवाएं ही प्रदान करती हैं, वे उत्पाद को स्वयं से नहीं बनाती बल्कि Manufacturing Units या थोक बाजार से ही अपने उत्पाद चुन कर उनकी सेवाएं ही प्रदान करती हैं.

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इसके अतिरिक्त परामर्श प्रदान करना (Consultancy) भी सेवा प्रदान व्यवसाय का मुख्य घटक है, जिसका उपयोग मौजूदा मार्केट में बहुत बड़े स्तरों पर किया जाता है. परामर्श प्रदान करने के लिए इच्छुक उम्मीदवार को वांछित विषय में पारंगत होना जरूरी होता है, जिस विषय पर वह परामर्श की सेवा देना चाहता है. तो चुनाव आपका है कि आप व्यवसाय/कारोबार के किस स्तर का चुनाव करते हैं.

सफल कारोबारी का व्यवसायिक दृष्टिकोण (Business Mindset)-

अमूमन हममें से कईयों के दिमाग में हमेशा कुछ ऐसे विचार (idea) जरूर पनपते हैं जिसने प्रभावित होकर हम एक सपना देखते हैं कि भविष्य में हम भी उस विचार का उपयोग कर अधिक से अधिक लोगों को लाभान्वित कर पाएंगे. असल में क्या आपने कभी गौर किया कि आखिर ये शानदार विचार कहां से आते हैं जो आपको भविष्य की दूरदर्शिता देते हैं? 

देखा जाए तो विचारों की यह सम्भावना निर्भर करती है नज़र और नज़रिये पर. मतलब आप किसी वस्तु का आंकलन किस प्रकार और किस स्तर पर करते हैं. जैसे- मान लीजिए मौजूदा समय में लगभग सभी के हाथ में smart phone तो होता ही है. 

अब यहां पर नजर और नजरिये को अच्छे से समझिए- हममें से कुछ लोगों के लिए एक smart phone बस मनोरंजन के साधन तक सीमित होता है, यह है नजर. वही हममें से कुछ लोगों के लिए वही फोन मनोरंजन के साथ-साथ कमाई का साधन भी बन जाता है, यह नजरिया. इसे और गहराई से समझिए-

साधारण उपभोक्ता के रूप में लगभग सभी को पहली नजर में महंगे उत्पाद अपनी ओर आकर्षित करते हैं और वो भी ऐसे उत्पाद जो उनकी आसान पहुंच से बाहर हो, वे उनको लेने के लिए लालायित रहते है, भले ही वे इस उत्पाद का भरपूर उपयोग कर पाएंगे या नहीं.

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ऐसा क्यों? क्योंकि आज बहुतों की मानसिकता में यह बात भीतर तक समां चुकी है कि यदि वे महंगे उत्पादों का उपयोग करेंगे तो उनको अपनी एक अलग पहचान मिलेगी. मेरे अनुभव से इस तरह की गतिविधि बचकानी हरकत के अलावा और कुछ नहीं है.

लेकिन वहीं यदि किसी के पास व्यवसायिक दृष्टिकोण या नजरिया मतलब सीमित लागत लगाकर उत्पाद को उच्च क्षमता तक उपयोग करने की क्षमता है तो सबसे पहले ऐसा व्यक्ति ऐसे फ़ोन या उत्पाद का चयन करेगा, जिसका वह भरपूर उपयोग कर पाए और अपने मौलिक कार्यों का प्रतिपादन करने के अलावा उस फ़ोन से ऐसी सामग्री का निर्माण कर पाए जिससे मुनाफा भी कमाया जा सके

यहीं पर कांसेप्ट आ जाता है liability और assets मतलब देयताएं और संपत्ति का. एक उभरते हुए सफल कारोबारी या व्यवसायी का पहला लक्षण यही होता है कि वह कोई भी कारोबार शुरू करने से पहले liability और assets को अच्छे से समझे…

और जब इनमें अंतर करना अच्छे से आ जाता है तो समझ लीजिए इच्छुक व्यक्ति भविष्य के भावी व्यवसायी होने की होड़ में शामिल हो चुका है. इसके बाद समझना होता है. बाजार की मांग (डिमांड) और वस्तु (उत्पाद/सेवा) की उपलब्धता.

सफल कारोबारी की नजर में देयताएं (liability)-

साधारण भाषा में देयताएं (liability) ऐसी वस्तुओं को कहा जाता है, जो हमारी जेब से पैसा खर्च कराती है. यह ऐसी वस्तुएं होती हैं जो हम अपने आवश्यकताओं या इच्छाओं की पूर्ति के लिए खरीदते और अपने उपयोग में लेते हैं, इन वस्तुओं पर लागत हमेशा लगती ही रहती है.

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संपत्ति (assets)-

संपत्ति (assets) उन वस्तुओं को कहा जाता है जिनपर प्राय: एक रणनीति बनाकर निवेश किया जाता है. देयताएं (liability) की लगभग सभी वस्तुओं को भी संपत्ति (assets) में परिवर्तित कर शामिल किया जा सकता है. साधारण भाषा में संपत्ति (assets) ऐसी वस्तुओं को कहा जाता है, जो हमारी जेब में पैसा बढ़ाने का काम कराती है.

उदाहरण के तौर पर ऊपर बताए गए फोन को ही ले लीजिये. हममें से कई लोग महंगे फोन का चुनाव इसलिए करते हैं ताकि सबके सामने हम हमारी एक अलग पहचान बना सके. यदि किसी व्यक्ति की ऐसी मानसिकता या अवधारणा है तो वह फोन उस व्यक्ति के लिए एक देयताएं (liability) मात्र है.

वहीँ यदि कोई व्यक्ति इसी फोन से न केवल अपने फोन के मौलिक कामों को करता है बल्कि वह इस फोन की मदद से ग्राफिक्स डिज़ाइन, फोटोग्राफी या वीडियो एडिटिंग जैसे कार्यों को कर मुनाफा कमाने का प्रयास करता है, तो यही फोन उस व्यक्ति के लिए liability न रहकर संपत्ति (assets) में परिवर्तित हो जाता है.

इसी तरह से लगभग प्रत्येक व्यवसाय में होता है, जहां कच्चा माल liability के रूप में होता है और इस कच्चे माल को प्रोसेस कर तैयार किया गया उत्पाद एक assets होता है.

सामान्य दृष्टिकोण को व्यवसायिक दृष्टिकोण में कैसे बदलें (Convert to Business Mindset)-

असल में जब हम अपनी भौतिक आवश्यकताओं की पूर्ती के लिए अपने स्थानीय बाजार में जाते हैं तो दुकान पर ढेर सारे तरह-तरह के समान देखने को मिलते हैं, जहां हममें से अधिकांश केवल उस वस्तु पर ही केन्द्रित होते हैं जिस वस्तु की हमें आवश्यकता होती है. यह मात्र एक सामान्य दृष्टिकोण है जो सभी का होता है.

लेकिन जब एक व्यवसायी जन-साधारण के रूप में किसी दुकान पर आवश्यकता पूर्ती के लिए समान लेने या खरीदने जाता है तो वह अपने वांछित समान को तो लेता ही है साथ ही वह पूरी दुकान का मानसिक तौर पर आंकलन और दुकान में मौजूद उत्पादों की विस्तृत समीक्षा भी करता है.

मसलन दुकान पर कितनी वस्तुओं की उपलब्धता है और किन-किन वस्तुओं की डिमांड अधिक हो रही है? साथ ही वस्तुओं को खरीदने वाले आम उपभोक्ताओं की उत्पाद के प्रति व्यक्तिगत राय क्या है? मतलब वांछित उत्पाद के प्रति ग्राहक की मानसिकता क्या है?

देखिये! यदि आप एक सफल कारोबारी या व्यवसायी बनने के इच्छुक हैं तो मनोविज्ञान की कुछ बातों को समझना आपके लिए बहुत जरूरी है क्योंकि किसी भी व्यवसाय की शुरुआत आम लोगों की पहुच से प्रारंभ होती है, ऐसा इसलिए क्योंकि आपके सबसे पहले उपभोक्ता/ग्राहक आम लोग ही होते हैं. 

अतएव यह बेहद जरूरी है कि आप सबसे पहले अपने ग्राहकों/उपभोक्ताओं को पहचाने और उनकी मानसिकता को समझने का प्रयास हमेशा करें.

एक सफल व्यवसायीय अथवा उद्यमी बनने के लिए यह बिल्कुल जरूरी नहीं कि वांछित व्यवसाय की शुरुआत हमेशा बड़े निवेश के साथ ही की जाए बल्कि सफल कारोबारी/उद्यमी बनने का सबसे पहला लक्षण होता है कि वस्तुओं को देखने और परखने का नजरिया.

जिसे हम सामान्य भाषा में business mindset के नाम से जानते हैं, इसी नजरिये या business mindset के कारण ही हमेशा innovative ideas का जन्म होता है जो एक सफल कारोबार या व्यवसाय की नींव बनता है.

जहां से ढेरों business ideas निकलकर आते हैं. जैसे- बिना लागत के व्यवसाय कैसे करें? (Zero investment business idea), कम पैसों में व्यवसाय कैसे करें? (Low Investment business ideas) आदि व अन्य. इस तरह के business ideas पूरी तरह से केन्द्रित business mindset होने पर ही आते हैं, और अधिकतर उनके द्वारा ही दिए/सुझाए जाते हैं जो अपने व्यवसाय में सफल हैं.

सफल कारोबारी का विशेष गुण “मना करने की क्षमता (Power of Say No)”-

किसी भी व्यवसायीय अथवा उद्यमी को अपने व्यवसाय की सफलता के लिए एक बात का सबसे खास ध्यान रखना जरूरी होता है और वो है “मना करना (say no)” मतलब “न बोलने की क्षमता का विकास करना.” देखिये आज जो भी व्यवसायीय, कारोबारी या उद्यमी अपने कारोबार में सफल हैं उन्होंने केवल अपने लक्ष्य प्राप्ति को ध्यान में रखते हुए बाधा उत्पन्न करने वाली बाकी सभी चीजों को नकारने की क्षमता का विकास कर लिया है.

इसे एक उदाहरण से समझिये! मान लीजिए आपने किसी व्यवसाय की शुरुआत की है, तो शुरूआती चरण में आपके पास व्यवसाय शुरू करने के लिए एक सीमित निवेश धनराशी लागत के रूप में होगी, परन्तु आपके चयनित व्यवसाय या कारोबार में अपार संभावनाएं पहले से ही मौजूद हो सकती हैं,

इसी स्थिति पर सबसे ज्यादा समझने की आवश्यकता होती है क्योंकि यहां पर आपको चुनाव करना होगा कि आप कारोबार के किस पहलू या स्तर से अपने व्यवसाय की शुरुआत करना चाहते हैं.

एक बार जब आप अपने व्यवसाय के स्तर को चुन लें तो यही आपका लक्ष्य निर्धारण होना चाहिए, ऐसा करने से आप अपने बिजनेस में जल्द ही पारंगत (expert) हो जाएंगे और expert के लिए सफलता पाना कोई मुश्किल काम होता है क्या? इसका जवाब आप comment box में जरूर बताईएगा.

अक्सर नए व उभरते हुए व्यवसायियों/कारोबारियों व उद्यमियों के अन्दर न बोलने या मना करने की प्रवृत्ति अधिकतर बहुत ही कम या न के बराबर ही देखने को मिलती है, जिस कारण अपने startup के कई सालों बाद भी सफलता पाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है.

एक पुरानी कहावत है जो पूरी तरह से सही महसूस होती है और जो भी भविष्य में एक सफल कारोबारी, उद्यमी अथवा व्यवसायीय बनाना चाहता है उसे इस कहावत से हमेशा वास्ता (जहन में) रखना जरूरी है-

एक को थामकर चलोगे तो जल्दी सफल हो जाओगे….

वहीं अगर हर एक की तरफ भागोगे तो फक्कड़ हो जाओगे…..

FAQ.

एक सफल कारोबारी, उद्यमी अथवा बिजनेसमैन (Successful Business) में क्या-क्या गुण होने चाहिए?

एक सफल कारोबारी, उद्यमी अथवा बिजनेसमैन की सोच/लक्षण में सबसे पहले…
1.       अपने कारोबार के प्रति समर्पण
2.       कारोबार के प्रति ईमानदार और गंभीर होना
3.       समय अनुसार सटीक निर्णय लेने की क्षमता का होना
4.       हमेशा सकारात्मक सोच रखना
5.       परोपकार की भावना (सहयोग करने की प्रवृत्ति) का होना
6.       खुद को व अपने कर्मचारियों को पुरुस्कृत करते रहने का गुण
7.       बाजार की गतिविधियों पर नजर बनाए रखने का गुण
8.       कारोबार को सही ढंग से विज्ञापित करना आदि.

एक साधारण इंसान सफल बिजनेसमैन (Successful Business) कैसे बने अथवा बन सकता है?

बिजनेसमैन बनने के लिए किसी भी साधारण व्यक्ति को अपने अन्दर प्रतिस्पर्धा (Competition) करने और उस प्रतिस्पर्धा में कामयाब होने की चाहत/जिद को विकसित करना प्राथमिक चरण है…

इसके बाद मार्केट का आंकलन (Market Analysis) करना, अपने ग्राहकों की पहचान करना आदि करना होता है. इन सभी चरणों को पूरा कर लेने के बाद सबसे अंतिम में अपने व्यवसाय/उद्यम/कारोबार की शुरुआत (उत्पाद निर्माण अथवा सेवा) करनी चाहिए.

अंत में-

यदि आप अपना खुद का एक कारोबार शुरू कर सफल कारोबारी/बिजनेसमैन बनाना चाहते हैं तो सबसे पहले आपको अपनी चीजों को देखने का नजरिये, परखने और आंकलन करने के तरीके पर जोर देना जरूरी है और जब आप ऐसा करेंगे तो आपका साधारण mindset एक business mindset में बदलने लगेगा, जिससे आपके जहन में एक नहीं बल्कि कई शानदार business ideas का जन्म होना स्वाभाविक है.

जिसमें से आप किसी भी एक business idea का चुनाव कर एक सफल कारोबारी/व्यवसायीय/बिजनेसमैन बनने की राह पर निकल सकते हैं और भविष्य के भावी बिजनेसमैन, व्यवसायीय, उद्यमी या कारोबारी भी बन सकते हैं. आज की पोस्ट में इतना ही ….

आशा है इस लेख “सफल कारोबारी की खास बातें” से आपको एक सफल कारोबारी/उद्यमी अथवा व्यवसायीय बनाने की अहम जानकारी जरूर मिली होगी, साथ ही यदि कुछ छूट गया हो या कुछ कहना या पूछना चाहते हों तो कृपया comment box में लिखें…. पोस्ट अच्छी लगी हो तो इसे अपने साथियों व जरूरतमंद लोगों के साथ share करना बिल्कुल न भूलें, आपका एक share शायद किसी को नई दिशा दिखा दे……

“शुभकामनाएं आपके सफल कारोबारी/व्यवसायिक भविष्य के लिए”

धन्यवाद!

जय हिंद! जय भारत!

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