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कम लागत से एप्पल बेर की खेती में कमाएं तगड़ा मुनाफा | Profitable Apple Ber Ki Kheti | Apple Ber Cultivation in hindi

एप्पल बेर की खेती (Apple ber ki kheti): मौजूदा समय में कई किसान ऐसी खेती/कृषि की ओर रुख कर रहें हैं, जहां लागत एक बार लगानी पड़े और मुनाफा साल दर साल होता रहे. ऐसे में एप्पल बेर की खेती उनके लिए एक लाभदायक और सबसे कारगर विकल्प बनकर उभरी है. apple ber जिसे अंग्रेजी में Jujube Fruit के नाम से जाना जाता है.

एप्पल बेर मूल रूप से बेर की हाइब्रिड किस्म है, जिसे वौज्ञानिक अनुसंधान द्वारा विकसित किया गया है. एप्पल बेर, मूल बेरों की अपेक्षा खाने में अधिक स्वादिष्ट होने के साथ इनमें मूल बेरों से अधिक गूदा तथा इनका बीज छोटा होता है.

भारत में बेर का इतिहास बहुत पुराना है, रामायण जैसे पवित्र महाकाव्य में सबरी के बेर का उल्लेख मिलता है, जिसे मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम ने ग्रहण किया था. मौजूदा समय में वैज्ञानिक पद्धतियों द्वारा बेर की कई व्यवसायिक किस्में (red apple ber/green apple ber) तैयार की जा चुकी हैं, जिसमें से एक है एप्पल बेर!

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एप्पल बेर मूल रूप से थाईलैंड की एक किस्म है, जिसे भारत में व्यवसायिक उत्पादन की दृष्टी से किसानो की आय बढ़ाने के लिए लाया गया था. इसका मूल नाम थाई एप्पल बेर (Thai Apple Ber) है. दिखने में यह बेर सेब (apple) की तरह होता है, जबकि इसका स्वाद बेर की ही तरह होता है.

एप्पल बेर की खेती बाड़ी जानकारी-

बेर का पौधा/पेड़ झाड़ीदार होने के साथ शुष्क व अर्द्धशुष्क जलवायु में पनपने वाला पौधा है. जिसे समय-समय पर सही काट-छांट कर पेड़ के तरह विकसित कर बेर का उत्पादन किया जाता है. अमूमन अम्लीय, क्षारीय व कंकड़ीली मिट्टी में तथा कम वर्षा वाले क्षेत्रों में बेर का पौधा आसानी से पनप सकता है.

साथ ही बेर का उत्पादन भी कर सकता है. परन्तु यदि व्यवसायिक स्तर पर यदि बेर विशेषकर हाइब्रिड/एप्पल बेर की खेती (hybrid apple ber farming) की जाए तो इससे इच्छुक किसान/उद्यमी द्वारा साल दर साल एक अच्छी आय भी प्राप्त की जा सकती है.

एप्पल बेर एक नकदी फसल है, जिसे भारत के लगभग सभी स्थानों पर रोपित कर फल उत्पादन किया जा सकता है. चूंकि बेर का पौधा पथरीली, रेतीली व क्षारीय भूमि पर भी आसानी से पनप सकता है, इसलिए बेर की खेती को अपनाने में इच्छुक किसान को ज्यादा समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ता.

एक पूरी तरह से विकसित एप्पल बेर के पौधा/वृक्ष (apple ber plant) लगभग 40 से 50 किलोग्राम तक फसल का उत्पादन बड़ी आसानी से कर सकता है. पहले वर्ष में ही लागत की भरपाई सहजता से की जा सकती है साथ ही कुछ मुनाफा भी संभव है.

तो प्रश्न यह है कि एप्पल बेर की खेती (apple ber farming) के लिए इच्छुक किसान/उद्यमी को क्या-क्या जानना जरूरी है? आइये एप्पल बेर की खेती के बारे में विस्तार से चर्चा करते हैं-

एप्पल बेर की किस्में (Varieties of apple ber)-

एप्पल बेर की खेती अपनाने से पहले इच्छुक किसान/उद्यमी के बेर की किस्में विशेषकर हाइब्रिड किस्मों के बारे में जानना परम आवश्यक है.

  1. थाई एप्पल बेर (Thai apple ber)
  2. कश्मीरी एप्पल बेर (kashmiri apple ber)
  3. सेन्यूरन – 5
  4. कैथली
  5. उमरान (Umraan)
  6. मुण्डिया
  7. गोमा-कीर्ति

एप्पल बेर के फायदे (apple ber benefits)-

  • एप्पल बेर के फल (apple ber fruit) में शर्करा के साथ-साथ विटामिन-सी और खनिज प्रदार्थ जैसे- कैल्शियम, फास्फोरस व आयरन आदि लाभदायक खनिज तत्व होते हैं.
  • Apple Ber अन्य सामान्य बेरों की तुलना में अधिक मीठा, स्वादिष्ठ और गुणवता युक्त होता है.

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  • सेब की ही तरह apple ber में भी कई औषधीय गुण भी मौजूद होते है.
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  • सामान्य बेर की तुलना में एप्पल बेर के फल का मूल्य लगभग 2 से 3 गुणा मिलता है, जिससे  किसानों की आय भी बढ़ने की सम्भावना को बल मिलता है.
  • सामान्य बेरों की तुलना में एप्पल बेर का पौधा फसल/बेर का उत्पादन कम से कम 03 गुणा ज्यादा करता है. जो कि मुनाफे की दृष्टी से नकदी फसल को इंगित करता है.
  • हाइब्रिड बेर की खेती के लिए सरकार 50% सब्सिडी भी प्रदान करती है जो 3 सालों की किस्तों में आती है.
  • 100 ग्राम बेर फल से 0.8 ग्राम स्टार्च, 11.5 ग्राम शर्करा, 0.3 ग्राम जस्ता, 0.04 ग्राम कैल्शियम, 0.02 ग्राम फास्फोरस, 0.90 मिग्रा0 आयरन और लगभग 120 मिग्रा0 तक विटामिन-सी की प्राप्ति हो सकती है.
  • बेर का फल ही नहीं बल्कि बेर के पत्ते (ber ke patte) भी गुणों की खान है. बेर के पत्ते में anti inflammatory गुण होने के अलावा antioxidant के गुण भी पाए जाते है. वजन कम करने में इनका उपयोग किया जाता है.

पौधे की रोपाई के लिए मिट्टी तैयार करना (Prepared Soil Media)-

व्यवसायिक स्तर पर एप्पल बेर की खेती (apple ber cultivation) के लिए मिट्टी को तैयार करना व पौधे की रोपाई करना बहुत ही आसान है, जिसे किसी के द्वारा भी किया जा सकता है. प्रत्येक बेर के पौधे की व्यवस्थित तरीके से रोपाई करने के लिए पौधे से पौधे के बीच की दूरी लम्बाई में 10 से 15 फुट और चौड़ाई में 12 से 15 फुट की दूरी पर गडढा खोदकर की जाती है.

रोपाई से पूर्व गडढा तैयार करने के लिए गडढा कम से कम 02 फुट गहरा, 1.5 फुट लंबा तथा 1.5 फुट चौड़ा होना जरूरी है. निर्धारित मानक का गडढा खोद लेने के बाद इस गडढे में गोबर की खाद और यदि संभव हो सके तो बजरी/रेत अन्यथा गडढे से निकली मिट्टी को खाद में मिलाकर भर दिया जाता है.

इसके बाद गड्ढ़े पर पानी से तराई कर 01 सप्ताह के लिए ऐसे ही छोड़ दिया जाता है, 01 सप्ताह बाद गड्ढा, बेर का पौधा रोपने के लिए तैयार है. अब इसमें बेर के पौधे (apple ber plant) की रोपाई की जाती है.

सुझाव-

  1. यदि रोपण स्थान की भूमि/मिट्टी में रहने वाले कीट आदि हैं, तो दीमक नाशक अथवा नीम खली का उपयोग अवश्य करें.
  2. पौधा रोपण की क्यारियां ऐसे बनाए जिससे पौधे के पास जलभराव न सके, जलभराव की स्थिति में पौधा सूख अथवा मर सकता है.
  3. चयनित खेत अथवा रोपण स्थान पर कंटीली बाढ़ (लोहे की तार) लगाना जरूरी है, जिससे पौधे को जंगली अथवा पालतू मवेशियों से बचाया जा सके.

एप्पल बेर की खेती में पानी का संतुलन-

एप्पल बेर की खेती के शुरूआती चरण में बेर के पौधे को पानी की आवश्यकता होती है. ताकि पौधा अच्छे से पनप सके, एकड़ अथवा बीघा पैमाने पर एप्पल बेर की फसल रोपने के लिए किसान भाइयों को डिप्प सिस्टम install करना एक कारगर रणनीति है.

वही यदि आप किचन गार्डेन के तहत बेर का पौधा लगा रहे हैं तो आपको पौधे को रोपने के बाद इतना पानी देना जरूरी है, जिससे पौधे की मिट्टी में हमेशा नमी रहे. कुल मिलाकर दिन में 01 बार पानी देना जरूरी है.

तेज धूप के दिनों में खेत में 15 दिन में एक बार तथा किचन गार्डनिंग के तहत दिन में 02 बार पानी एवं हर 15 दिन में 01 बार पानी के साथ माइक्रो न्यूट्रिएंट (micro nutrient) भी देने से गमले में भी एप्पल बेर के पौधे से बड़ी मात्रा में फल लिए जा सकते हैं.

गमले में एप्पल बेर की खेती कैसे करें-

यदि आप किचन गार्डेन अथवा टेरेस गार्डेन के तहत एप्पल बेर के पौधे से फल लेना चाहते हैं तो गमले अथवा ग्रो बैग में बेर के पौधे का रोपण कर बेर का उत्पादन सफलतापूर्वक किया जा सकता है. बेर का पौधा रोपने के लिए आपको कम से कम 2 X 2 X 4 फुट (लम्बाई X चौड़ाई X ऊंचाई/गहराई) नाप का गमला अथवा ग्रो बैग की आवश्यकता होगी. गमला अथवा ग्रो बैग तैयार कर लेने के बाद बारी आती है, रोपने वाली मिट्टी को तैयार करना.

गमले के लिए मिट्टी तैयार करना-

गमले अथवा ग्रो बैग में एप्पल बेर का पौधा रोपने के लिए जिस प्रकार की मिट्टी की आवश्यकता होती है, उसे बहुत ही सरलता से घर पर बनाया जा सकता है. मिट्टी तैयार करने के लिए इन घटकों की आवश्यकता होती है-

घटकमात्रा 
नदी की रेत/मोरंग50% 
साधारण मिटटी30% 
गोबर खाद/वर्मी कम्पोस्ट20% 
नीम खली3 मुट्ठी 
स्टोन पाउडर5 मुट्ठी 

एप्पल बेर का पौधा कहां से मिलेगा?

एप्पल बेर का पौधा खरीदने के लिए सबसे पहले आप अपनी स्थानीय पौध नर्सरी (apple ber nursery) से सम्पर्क करें, जहाँ एप्पल बेर पौधे की कीमत (apple ber plant price) प्रति पौधा 40 से लेकर 70 रूपये तक हो सकती है.

यदि आपके स्थनीय नर्सरी में एप्पल बेर का पौधा नहीं मिल रहा है, तो आप एप्पल बेर के पौधे को ऑनलाइन भी खरीद सकते हैं. ऑनलाइन खरीदने के लिए यहां क्लिक करें- एप्पल बेर का पौधा

एप्पल बेर की खेती में कीट प्रबंधन-

बेर के पौधे पर मुख्य रूप से फल छेदक, पत्ती खाने वाले सुंडी, फल मक्खी, मिलीबग, स्केल कीट और थ्रिप्स के आक्रमण अधिक होते हैं. इन कीटों से बचाव के लिए स्थानीय कृषि रोग निवारण दवा केंद्र से संपर्क करें, अमूमन दवाओं के नाम बदलते रहते हैं. इसलिए यहां दवा का उल्लेख करना उचित नहीं है.

प्राकृतिक रूप से कीट प्रबंधन करने के लिए नीम तेल और नीम खली का उपयोग किया जा सकता है. 01 लीटर पानी में 03 से 05 ml नीम तेल मिलाकर बेर के पौधे के कीट जनित स्थान पर सप्ताह में कम से कम 02 बार स्प्रे करना होता है. साथ ही पौधे की जड़ में हर 03 माह में 200-300 ग्राम नीम खली हल्की गुड़ाई कर बेर के पौधे को कीटों से संरक्षित किया जा सकता है.

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एप्पल बेर की खेती के रोग-

एप्पल बेर की खेती तहत बेर के पौधे पर मुख्य रूप से लीफ ब्लैक स्पॉट, ख़स्ता फफूंदी आदि रोग देखने को मिलते हैं. अधिकांश मामलों में पौधे के रोग ख़राब मिट्टी के कारण ही पनपते हैं, ऐसे में यदि मिट्टी की गुणवत्ता सुधार ली जाए तो कई संक्रामक रोग धीरे-धीरे स्वत: ही समाप्त हो जाते हैं.

इसके अलावा आप केमिकल आधारित दवाओं अथवा नीम तेल तथा नीम खली का भी उपयोग कर सकते हैं. अगर दवाओं से भी पौधे पर कीट कम नहीं हो रहे हैं तो सबसे आखिर में पौधे की कटिंग करना मजबूरी हो जाती है.

फूल झड़ने की समस्या-

अमूमन अधिकतर नए किसानों अथवा पहली बार बेर की खेती करने वाले उद्यमियों को बेर के फूल झड़ने की समस्या में जूझते देखा जा सकता है. देखिये! बेर के पौधे से फूल झड़ना कोई समस्या नहीं है, यदि आपका पौधा स्वस्थ है, तो पौधे से मेल फूल पोलिनेशन हो जाने के बाद स्वत: ही झड़ जाते हैं.

सही जानकारी का अभाव होने के कारण अधिकतर लोगों के बेर का फूल झड़ने की समस्या सिरदर्द बनी रहती है. व्यवसायिक स्तर खेत में एप्पल बेर की खेती में अमूमन कोई बड़ी समस्या आती ही नहीं है.

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वहीं यदि किचन गार्डनिंग के तहत बेर के पौधे/पेड़ से आवश्यकता से अधिक फूल झड़ रहे हैं तो इसका समाधान ऐसे करें-

  1. पौधे को पानी देने की मात्रा पर संतुलित करें.
  2. नियमित तौर पर पौधे को खाद, नीम खली और कैल्सियम आधारित मिनरल जैसे- स्टोन पाउडर व बोन मील आदि दें,
  3. पौधे को ऐसे स्थान पर रखें जहां से उसे सीधे धूप मिलती रहे,
  4. पौधे पर अगर कीट संक्रमण होता है, तो बचाव के लिए कीटनाशक का छिड़काव करें.

एप्पल बेर के पौधे में फूल कब आते हैं?

एप्पल बेर के पौधे में फूल सितम्बर माह में आना शुरू हो जाते हैं.

फसल कब तक तैयार हो जाती है-

एप्पल बेर के पौधे में फूल आ जाने के बाद बेर के फलों को परिपक्व होने में 150 से 180 दिनों का समय लगता है. फलों की परिपक्वता का निर्धारण जलवायु और वातावरण पर भी निर्भर करता है. पहले वर्ष प्रति पौधा कम से कम 05 किलोग्राम तक, दूसरे वर्ष 15 से 22 किलोग्राम तक तथा तीसरे वर्ष से प्रति पौधे/पेड़ 40 से 50 किलोग्राम तक फल उत्पादन कर सकता है.

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व्यवसायिक स्तर पर बेरों की तुड़ाई करने से 01 सप्ताह पूर्व बेरों पर अग्रिम परिपक्वता लाने के लिए 750 P.P.M. इथेफाल का छिड़काव किया जाता है. (यह एक वैकल्पिक प्रक्रिया है बाजार में मांग के हिसाब से इसका उपयोग किया जाता है)

एप्पल बेर का मंडी भाव-

स्थानीय बाजार में एप्पल बेर भाव की बात करे तो 30 से 70 रुपये किलोग्राम की कीमत मिल जाती है, वहीं वहीं यदि बड़े स्तर पर एप्पल बेर की मंडी भाव (होल सेल) की बात करें तो थोक भाव में 25 से 40 रुपये किलोग्राम के भाव से ब्रिकी हो जाती है.

FAQ.

एप्पल बेर का पौधा कहां पर पनपता है?

एप्पल बेर का पौधा जल भराव वाले स्थानों को छोड़कर कहीं भी आसानी से पनप सकता है और फल (बेर) भी उत्पन्न कर कर सकता है.

बेर के पौधे की प्रूनिंग कब की जाती है?

अमूमन बेर के पौधे की कटाई, छटाई या प्रूनिंग फ्रूटिंग के 02 सप्ताह बाद अथवा बारिस के सीजन से तुरंत पहले की जाती है.

बेर के फल छोटी अवस्था में सूखकर झड़ रहे हैं?

छोटी अवस्था में फलों का सूख जाना अथवा गिर जाना पाले की निशानी है. अमूमन चढ़ती ठंड (नवम्बर-दिसंबर) में बेर के पौधे को रात में गिरने वाली ओस से बेर के पौधे को पाले का खतरा हो सकता है.

इसके उपचार के लिए बेर के हर एक पौधे की मिट्टी में पोटाश अथवा यूरिया का छिड्काव नीम खली के साथ किया जाता है. वही यदि संभव हो तो पाले से बचाने के लिए बेर की फसल को ग्रीन नेट से सुरक्षित किया जा सकता है.

अंत में-

स्वास्थ्य की दृष्टी से बेरों का सेवन करना (खाना) हमारे शरीर को बेहतर बनाता है, प्राचीन समय से हमारे पूर्वजो द्वारा इसका सेवन किया गया है जो आज की पीढ़ी के लिए एक super food बन चुका है और अपने गुणों के कारण पूरी दुनिया में उपयोग में लिया जा रहा है.

हमारा उद्देश्य सभी इच्छुक व्यवसायीयों, उद्यमियों, किसानों और खेती/कृषि प्रेमियों को बेहतर से बेहतर जानकारी प्रदान करना है, जिससे वे अपनी कृषि योग्यताओं को बेहतर से बेहतरीन बना सके और अपने द्वारा तैयार की गई ऑर्गेनिक सब्जियों और औषधियों से लाभ उठा सकें.

आशा है आपको इस लेख एप्पल बेर की खेती से बेर की खेती के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी जरूर मिली होगी, साथ ही… यदि कुछ छूट गया हो या कुछ पूछना चाहते हों तो कृपया comment box में जरूर लिखें. तब तक के लिए-

शुभकामनाएं आपके कामयाब और सफल कृषि के लिए

 धन्यवाद!

जय हिंद! जय भारत!

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